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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 749

बघेलवंशवर्णन । ( ७१९ )
नृप जगदीश निदेश लहि, शुद्ध मानि विख्यात॥
वंशपतीको करिलियो, भातहिमें अवदात ॥ ५८ ॥
पंडा तुलसीरामको, अग्निहोत्र करवाय ॥
कियो अग्निहोत्री विदित, रह्यो सुयश जग छाय॥ ५९॥
दशहजार मुद्रा अउर, दो हजारको ग्राम ॥
दै गोविंदगढ़ वास दिय, दै शुभ धाम अराम ॥२६०॥
छप्पय-श्रीरघुराज सुवाजपेयि किय रह यश छाई ॥
याचक सोइ सोइ वस्तु लही जोई मुख गाई ॥
विप्र जे याज्ञिक रहे लहे ते द्रव्य हजारन ॥
भूषण बसन अमोल हेत असवारी वारन ॥
कवि वंश कहै युगलेश चलि, देशान देश नरेश मधि ॥
ह्वै विन कलेश मुख गाय यश, भये धनेश सुरेश सधि १
कुंडलिया-सबनरनाहनते अधिक, बादशाह कियमान॥
महाराज रघुराजसों, कौन सुजान जहान ॥
कौन सुजान जहान, सुकवि करि सकै बखानै॥
जो बखश्यो वसु वसन, जननकहँ बे परमानै ॥
मानै निज लखि तजे भूप कलकत्ते महँ तब ॥
युगलदास यह कृपा जानिलीजै सँतिके सब ॥ १ ॥
कवित्तघनाक्षरी ।
वाजिन सवार राज राजिन कराय तहां निज असवारी साथ शाह सोधवायो है ॥
लाट कोठि कुरसीमें बांधवेशको बैठाय निज असवारीको जलूस दर्शायो है ॥
देखि सब भूप लेखि निजते अधिक मान शरमाय शीशते बिशेषिहीं नवायोहै ॥
सांच यदुराज कृपा जानै रघुराज परजौन सब राजनते अधिक बनायो है ॥१॥
दोहा-लाख लाय मुद्रा नज़र, देनचहे नरनाह ॥
तिनको लियो न मानि तृण, शाह सहित उत्साह॥६१॥
मुद्रा सहस पचासकी, दियो अँगूठी नाथ ॥
लै सराहि रघुराजको, पहिरिलियो निज हाथ ॥ ६२ ॥