कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ६३८ ) बीजक कबीरदास ।
देशदेशहमबागिया, ग्रामग्रामकी खोरि ॥
ऐसाजियराना मिला, जोलेइफटकिपछोरि ॥ ३१२ ॥
कबीरजी कहै हैं कि मैं देशदेश गाउँ गाउँ खोरि खोरि बाग्यो परन्तु ऐसा
जियरा मोको कोई न मिला कि जो मैं कहौ हौं ताको फटक पछोरि लेइ॥३१२॥
लोहे चुम्बक प्रीति जस, लोहा लेत उठाय ॥
ऐसा शब्द कबीरको, कालते लेइ छुड़ाय ॥ ३१३ ॥
लोहेकी औ चुम्बककी प्रीतिहै जो लोहको चुम्बक देखै है सो उठाय लेइहै
ऐसे कबीर जो है कायाको बीर जीव ताको या शब्द रामनामहै जौन जीवनकों
कालते छड़ाय लेयहै जैसे चुम्बक लोहे के किणकाको आपने में लगाय लेइहै
ऐसे रामनाम जीवको में लगाय लेइहै ॥ ३१३ ॥
गुरू विचारा क्या करै, शिष्यहिमेंहैचूक ॥
शब्द बाण बेधै नहीं, बाँसबजावैं फूंक ॥ ३१४ ॥
कबीरजी कहै हैं कि गुरू जो है साहव सो विचारा कहा करै शिष्य जो है
जीव तांहींमें चूकहै कौन चूकहै यासों कि रामनामरूपी जो शब्दबाण ताकें
साथ छइउजेचक्रहैं तिनको बेधिकै सातों चक्र जे हैं सुरतिचक्र ताको बेधिकै
उहां जो गुरुबतावैं हैं मकरतारडोरि ताही चढ़िकै रामनाम रूपीबाणके साथ
साहबके पास जायबो न जान्यो वहै निर्गुण ब्रह्म जो है झूरबाँस ताहीमें लगिकै
फूकि-फूंकि बजावै हैं अर्थात् वोहीको ज्ञानकथै हैं ॥ ३१४ ॥
दादाबाबाभाई कै लेखै,चरनहोइगे बंधा ॥
अबकी बेरिया जोना समझ्यो,सोईसदाहै अंधा ३१५॥
मानुष शरीर पायकै दादा बाबा भाई सब साहिबैको मानै है सोई साहबके
चरणको बंधा होइहै कहे साहबके चरणमें सदा लगे रहै हैं सो अबकी बेरिया
कहे या मानुष शरीर पायके साहबको न जान्यो सोई सदाको अंधाहै॥३१५॥