सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

पृष्ठ 543, कुल 766 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 543

बसंत । ( ४९७ )
संसार सागरको पार करनवारो एक राम नामही है तामें प्रमाण पद ॥ "माधव
दुख दारुण सहि न जाइ । मेरी चपल बुद्धि ताते का बसाइ ॥ तन मन
भीतर बस मदन चोर । तब ज्ञान रतन हरि लीन मोर ॥ हौं मैं अनाथ प्रभु
कहौं काहि । अनेक बिगूंचे मैं को आहि ॥ औ सनकसनंदन शिव शुकादि ।
आपुन कमला पति भो ब्रह्मादि ॥ योगी जंगम यति जटाधारि अपने अवसर
सब गयेहारि॥ सो कह कबीर करि संत सात । अभ्यंतर हरिसों करहु बात॥
मन ज्ञान जान करि करि बिचार । श्री राम नाम भजु होउ पार"॥ १-६ ॥
इति दशवां बसंत समाप्त ।
अथ ग्यारहवां बसन्त ॥ ११ ॥
शिवकाशीकैसीभैतुम्हारि।अजहूँहोशिवदेखहुविचारि ॥१॥
चोवाअरुचन्दनअगरपान। सबघरघरस्मृतिहोइपुरान॥२॥
बहुविधिभवननमेंलगैभोग।असनगरकोलाहलकरतलोग३
बहुविधिपरजानिर्भयहैंतोर। तेहिकारणचितहैढीठमोर॥४॥
हमरेवालककरयहैज्ञान । तोहींहरिकोसमुझवैआन ॥ ५ ॥
जगजो जेहिसों मनरहल लाय। सोजिवकेमरेकहुक हँ समाय ६
तहंजोकछुजाकरहोयअकाज।हैताहिदोषनहिंसाहवलाज ७
तवहरहर्षितसोकहलभेव । जहँहमहींहैंतहँदुसरकेव ॥ ८ ॥
तुमदिनाचारिमनधरहुधीर।पुनिजसदेखहुतसकहकवीर९॥
शिवकाशीकैसीभैतुम्हारि।अजहूँहोशिवदेखहुविचारि ॥१॥
चोवाअरुचन्दनअगरपान।सबघरघरस्मृतिहोइपुरान ॥२॥
बहुविधिभवननमेंलगैभोग।असनगरकोलाहलकरतलोग ३
बहुविधिपरजा निर्भयहैंतोर।तेहिकारणचितहैढीठमोर ॥४॥
श्री कबीरजी कहै हैं कि जब मैं बालपन में साधन करत रह्यों है तबहीं
देवतनको दर्शन होत रह्यो है । सो मैं महादेवजीते पूछ्यो कि, यह काशी
३२