कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
पृष्ठ 406, कुल 766 में से
संदर्भ में पढ़ें( ३५८ ) बीजक कबीरदास ।
अथ सतहत्तरवां शब्द ॥ ७७ ॥
आपन आश किये बहु तेरा। काहु न मर्म पाव हरि केरा ॥१॥
इन्द्री कहां करै विश्राम । सो कहँ गये जो कहते राम ॥२॥
सो कहँ गये होत अज्ञान।होय मृतक वहि पदहि समान॥३॥
रामानंद् राम रस छाके।कह कबीर हम कहि कहिथाके॥४॥
आपन आश किये बहुतेरा । काहु न मर्म पाव हरि केरा ॥१॥
आपने स्वरूपके चीन्हिबे की बहुतेरा कहे बहुत आशकिये कि हमारों
आत्मै सबको मालिकह यहीके जानेते हम मुक्त ह्वै जाइँगे परन्तु मुक्त न भये
अरु हरि जे परमपुरुष पर श्रीरामचन्द्र सबकें कलेश हरनवारे हैं तिनकों
मर्म न पायो अर्थात् उनको कोई न चीन्ह्यो ॥ १ ॥
इंद्री कहांकरै विश्राम । सो कहँगये जो कहते राम॥२॥
अरु यह कोई नहीं विचार करै है कि इन्द्री कहा बिश्राम करै है काहेतें
कि इन्द्रीके जे देवता हैं तिनते समेत इन्द्रीतो मनते चैतन्य हैं औ मन जीवात्मा
ते चैतन्यहै औ जीवात्मा परमपुरुषपर श्रीरामचंद्र के प्रकाशते चैतन्य है सो
जे आपने स्वरूपको बिचार करै हैं कि महीं रामहौं ते वे रामभर कहांगये अर्थात्
नहीं गये ब्रह्ममें समान रहे अरु एक एकते चैतन्यहै तामें श्रीगोसाई तुलसीदास
को प्रमाण ॥ ‘‘ बिषय करन सुर जीव समेता । सकल एकते एक सचेता ॥
सबकर परम प्रकाशक जोई । राम अनादि अवधपति सोई ॥ जगत प्रकाश
प्रकाशक रामू । मायाधीश ज्ञान गुणधामू ’’ ॥ २ ॥
सो कहँगये होत अज्ञान । होय मृतक यहि पदहि समान॥३॥
रामानंद राम रसछाके। कह कबीर हम कहि कहि थाके॥४॥
जीव ब्रह्ममें समान रह्यो शुद्ध रह्यो जब मनकी उत्पत्ति भई अज्ञान भयो सों
कहांगयो अर्थात् तब मृतक ह्वैकै आपने स्वरूपको भुलायकै यहि पदहि कहे यहि
संसारमें समान॥ ३॥ श्रीकबीरजी कहैहैं कि हम चारों युगमें कहि कहि थकिगये