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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 38

मूल रमैनी प्रारम्भ ।
( अक्षर खण्डकी रमैनी )
प्रथमशब्दहैशून्याकार ॥ परा^१अव्यक्त सोकह्रै बिचार॥अंतः
करणउदयजबहोय ॥ पश्यंति^२अर्धमात्रासोय ॥ स्वर^३सोकंठ
मँध्यमा^४जान ॥ चौंतिस^५अक्षरमुखस्थान ॥ अनवनिबानि^६तेहि-
केमांहि ॥ विनजानेनरभटका^७खांहि ॥ बानी अक्षर स्वर संमु-
दाय ॥ अर्ध^८पश्यंतिजातनशाय ॥ शून्याकारसोप्रथमारहै ॥
अक्षरब्रह्मसनातनकह्रै ॥ निर्वृति^९ ॥ प्रवृति^१०हैशब्दाकार ॥ प्रण-
व^११जानेइहेबिवार ॥ साक्षी ॥ अँकुलाहट^१२केशब्दजो, भई
चारसोभेष ॥ बहुबानीबहुरूपकै पृथकपृथकसबदेश ॥ १ ॥
रमैनी॥अनवनिबानीचारप्रकार ॥ १ काल २ संधि ३ झांई ४
औ सार॥ हेतुशब्दबूझियेजोय ॥ जानिय येंथारथ^१३ द्वारा^१५सोय॥
भ्रमिक^१४झांईसंधिकऔकाल ॥ सारशब्दकाटेभ्रमजाल ॥ द्वारों
चारअर्थपरमान ॥ पद^१६ारथ व्यंग^१७ाथपहिचान भौार्थ^१८ १९
ध्वन्यार्थचार ॥ द्वाराशब्दकोइलखेविचार ॥ पैरा^२० पराइति
मुखसोजान ॥ मोरे सोरहकला निदान ॥ साक्षी ॥ विन-
जानेसोरहकला, शब्दीशब्द कौआयै^२१ ॥ शब्द सुधारप-
१ इसका स्थान नाभी ॥ २ इसका स्थान हृदय ॥ ३ सोलह स्वर अ
आ इत्यादि ॥ ४ इसका स्थान कंठ ॥ ५ व्यंजन ॥ ६ नाना प्रकारकी ॥
७ इकट्ठा ॥ ८ पश्यंति होय फिर परा अवस्था को प्राप्त होता है ॥ ९ लय॥
१० उत्पत्ति ॥ ११ ओंकार ॥ १२ उबिआहट ॥ १३ सच्चा ॥ १४
भरमाने ॥ १५ मार्ग, रस्ता ॥ १६ पद, अर्थ, शब्दका जो अर्थ, शब्दार्थ॥
१७ व्यंग, अर्थ, व्यंग भाव से जो कहा जावे ॥ १८ मतलब आशय
वाला जो अर्थ १९ ध्वनिमात्र ॥ २० परा और अपरा दो विद्या कोई शब्द
परा विद्या को वर्णन करता है कोई अपरा को ॥ २१ भटकता है ॥