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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

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पृष्ठ 36

श्रीकबीरजीकी कथा । ( ३३ )
( श्रीनाभाजीके भक्तमालसे टीकासहित )
॥ मूल ॥ कबीर कानि राखी नहीं वर्णाश्रमषटदरशनी ॥ भक्तिविमुखजोधर्म
सोअधर्मकरिगायो । योगयज्ञव्रतदानभजनविनतुच्छदिखायो ॥ हिंदूतुरकप्रमानर-
मैनी सबदीसाषी । पक्षपात नहिं वचनसबहिंकेहितकीभाषी ॥ आरूढ़दशाहैजगतपर
मुखदेखीनाहिंनभनी । कबीरकानिराखीनहींवर्णाश्रमषटदरशनी ॥ ६० ॥
टीका ॥ अतिहीँगँभीरमतिसरसकवीरहियोलियोभक्तिभावजातिपाँतिसबटारिये॥
भई नभवाणीदेहतिलक रवानीकरौ करौगुरुरामानंद गरेमालधारिये । देखेनहींमुखमे
रोज़ानिकैम्लेच्छमोको जातन्हानगंगाकहीमगतनडारिये । रजनीकेशेषमयआवेश-
सोंचलतआपपरै पगरानीकहेंमंत्रसोंविचारिये ॥ २६५ ॥ कीनीवहीबातमालाति-
ळकबनाइगातमानिउतपातमातशोर कियोभार