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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 230

( १८० ) बीजक कबीरदास ।
बिचारहैं नेति नेति कहैहै याते सब खोटही द्वैगयो ॥ ३ ॥ श्रीकबीरजी कहै हैं
सांचो जो है साहब रक्षकताको न जान्यो जिनकहे झीन आशा जो है कि
हमब्रह्म है जायँ तौनेको तोरि ब्रह्ममें लीनहोगे फिरि संसार परोगे तब काकों
खोरी देहुगो तुम्हीं ब्रह्महौ ॥ ४ ॥
इति असिर्वीं रमैनी समाप्ता ।
अथ इक्यासिवीं रमैनी ।
चौपाई ।
देवचरित्र सुनौ रे भाई । सो तो ब्रह्मा धिया नशाई ॥ १ ॥
ऊजेसुनी मँदोदरि तारा।ज्यहिघर जेठ सदा लगवारा॥२॥
सुरपतिजाइअहल्यहिछलिया। सुरगुरुघरणि चंद्रमाहरिया ३
कह कबीर हरिके गुणगाया । कुंतीकर्ण कुंवारेहि जाया ४
देवचरित्र सुनौरे भाई । सोतो ब्रह्माधिया नशाई ॥ १ ॥
ऊजेसुनीमँदोदरि तारा । ज्यहिघर जेठसदा लगवारा ॥२॥
बड़ेबड़े जीव मायामें परिकै भूलिगयेहैं छोटे जीवनको कहा कहियेहे भाइउ!
देवचरित्र सुनौ ब्रह्मा अपनी कन्यासंग भूलि गये ॥ १ ॥ ऊजे मन्दोदरी
ताराजेहैं तिनके घरमेंजेठही लगवारहोत आयोहै जो कहो सुग्रीव बिभीषणकों
कहतेहौ तौ तिनके घर न कहते तिनके कहते औ ई लहुरे हैं वेजेठकहैं सो
ब्रह्माके हवाले कह्यो ब्रह्माके पुत्र आपसमें काज करतभये सो पुलस्त्य जेठे हैं
ते लहुरे भाईकी कन्याको बिवाहे या मन्दोदरीके घरको हवाल भयो औ
ऋक्षराजस्त्री भये तिन्हें सूर्य औ इन्द्रगहे तिनते सुग्रीव औ बालिभये सो प्रथम
सूर्य ग्रहण कीन्हो सो उनकी स्त्री भई औ सूर्यते जेठेइन्द्रहैं तेऊपीछे ग्रहणकियो
ताराके घरको हवाल भयो सो तारा मन्दोदरीके घर जेठही लगवार होत आयो
है जो लहुर पाठहोइ तौ सुग्रीव बिभीषण बने हैं सो यहां नहीं है ॥ २ ॥