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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 228

( १७८ ) बीजक कबीरदास ।
अथ उन्नासिवीं रमैनी ।
चौपाई ।
बढ़वतवाढ़ि घटावत छोटी । परखतखर परखावतखोटी १
केतिक कहौं कहांलों कही । औरौ कहौं परै जो सही॥२॥
कहे विनामोहिं रहो न जाई। बेरंहि लैलै कूकुर खाई ॥ ३॥
साखी ॥ खाते खाते युगगया, अजहुं न चेतो जाय ॥
कहहिं कबीर पुकारि कै, जीव अचेतै जाय॥ ४॥
बढ़वतवाढ़िघटावतछोटी।परखतखरपरखावतखोटी ॥१॥
केतिककहौं कहांलों कही । औरौ कहौं परै जो सही ॥२॥
कहे बिना मोहिं रहो न जाई । बेरहिलैलै कूकुरखाई ॥३॥
यह माया को प्रपंच जोहै सो बढ़ावत जाइतो बढ़तई जाय है रंकते इंद्रहू
ह्वैजाय तऊ चाह बढ़तई जायहै औ जो घटाइबैलगे तो घटिही जाइहै औ नाना-
मतमें लगि मनमुखी बिचारैहै तब तो खर कहे सांचैहै औ जब काहू साधुते
परखायो तब झूठहीहै जायहै ॥ १ ॥ औमैं केतिको बातकह्यो परन्तु पाथरकै-
सो पानी बहि जाइहै बेधै तौ हुईनहीं है मैं कहांलों कहौं औ औरऊ कहौं जो
सहीपरै कहे जो तोको सांच जानिपरै ॥२ ॥ हे जीव!तेरे ये दुःखदेखिकै मोको
दयाहोइहै ताते बिनाकहे मोसों नहीं रहिजाइहै जौने बेरा रामनाम संसार सागर-
के उतरिबे को मैं बताइदेउँहौं तौने बेराको कूकुर जे तामस शास्त्रवारे गुरुवालोग
ते खाई जाइहैं कहे मेरोकहो तामें नहीं लगन देइहैं औरै औरै मतमें लगाइ
देइहैं जो यहपाठ होई “बिरहिनि लैलैकूकुर खाइ” तौ यह अर्थ है कि बिरहिन
जेलोगहैं जिनको साहबकी अप्राप्ति है तिनको गुरुवालोग खाइ जाइहैं अथवा
बीर जे साहबहैं तिनते हीनजे प्राणी हैं तिनको कूकुर खाइहैं ॥ ३ ॥
साखी ॥ खाते खाते युगगया, अजहुं न चेतो जाय ॥
कहहिंकबीर पुकारिकै, जीव अचेतै जाय ॥ ४ ॥