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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 148

रमैनी । ( ९७ )
बज्रहुते तृण क्षणमें करिदेइहै अरु तृणते बज्रकरिदेइहै ऐसेपरमपुरुष श्रीरामच-
न्द्रको जानो ॥१॥ निझरूनरूकहे जिनको मायाब्रह्मको धोखा निझरि गयो कहें
मिटिगयो ऐसे जे नर हैं ते पूरा गुरुपाइकै परमपुरुष जे श्रीरामचन्द्र तिनको
जानिकै संपूर्ण जगत्के कर्म त्यागिदेइँ हैं औ जे कर्ममें बँधे हैं ते अनेक लालचकरै
हैं कोई द्रव्यादिक की कोई ब्रह्ममिलन की कोईईश्वरनकी ॥ २ ॥
कर्मधर्मबुधिमतिपरिहरिया। झूठानामसांचलैधरिया ॥३॥
रजुगतित्रिविधिकीनपरकाशा। कर्मधर्मबुधिकेरविनाशा ४॥
साहबके मिलनवारो जो कर्मधर्म बुधिहै ताको त्यागिदेतेभये झूठेझूठे जे
देवताहैं तिनको नाम सांचमानिकैजपतभये ॥३॥ गुरुवालोग रजोगुणी तमोगुणी
सतोगुणी तीनप्रकारके मत प्रकाशकैकै साहबके मिलनवारो जो कर्म धर्म बुधि
है ताको नाशकरि देत भये ॥ ४ ॥
रविकेउदयतारा भोछीना । चरवेहरदोनों में लीना ॥ ५ ॥
विषकेखायेविषनहिंजावै । गारुड़सोजोमरतजिआवै ॥६॥
हे जीवो ! गुरुवालोग तुमको उपदेश देयँ हैं जैसे सूर्यके उदय मो ताराकों
तेजक्षीण ह्रैजायहै ऐसे जबज्ञानभयो जीवत्वमिट्यो तब चर औ वेहर जो अचर ये
दोनोंमें लीन ह्रै जाय है चरअचर ब्रह्मरूपते आपनेनको मानैहै॥५॥सो साहब कहैं हैं
कि हेजीवो! ऐसो उपदेश जो गुरुवालोग तुम्हें दियो सो ठीकनहीं है काहेतें
कि संसार बिष उतारिबेको तुम धोखा ब्रह्ममें लगैहै। सो बिषके खाये बिष
नहीं जाइहै यह धोखाब्रह्म बिषरूपैहै संसार देनवारोहै गारुड़ सो कहावैहै जो
मरतमें जिआइलेइ सोमेरोज्ञान धोखा ब्रह्मबिषते बचाई कालते बचाइलेइ ताकों
जानो ॥ ६ ॥
साखी ॥ अलखजोलागीपलकमों, पलकहि मोंडसिजाय ॥
विषहरमंत्र न मानही, गारुड़ काह कराय ॥ ७ ॥
७