कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें(५१) बीजक कबीरदास ।
रामचन्द्र हैं तिनको वेद, पुराण, कुरान, शास्त्र, महात्मा इनकेद्वारा देखतऊहै
औ जिनको वर्णन करिआये सनकादिक महात्मन को उद्धार द्वैगयो यहौ ज्ञान-
दृष्टि देखतऊ हैं परन्तु ये मूर्ख जीव गुरुवालोग ना जाने तेहिते अदृष्टि कहावैं
हैं कहै आँधरैं कहावै हैं । परमतत्त्व श्रीरामचन्द्रही हैं तामें प्रमाण । (रामएवप
रंतत्त्वं श्रीरामोब्रह्मतारकम् ॥ इतिहनुमदुपनिषद् ) जो यह कहैं शुकसनकादिक
येऊ न जान्यो तौ अब को जानैगो नास्तिकपना आवै बस्तु मिथ्या होय है
ताते साधु तौ जानतई हैं जिनको साहब जनाय दियो है कबीरौजी कहै हैं ॥
(ध्रुवप्रह्लादउबारिया सोहरिहमरेसाथ । हमको शंकाकछुनहीं, हमसेवैं रघुनाथ)
इति आठवीं रमैनी समाप्तम् ।
अथ नवीं रमैनी ।
चौपाई ।
बांधे अष्ट कष्ट नौ सुता । यमबांधे अंजनिके पूता ॥ १ ॥
यमकेवाहनबांधिनिजनी । बांधेसृष्टिकहालौंगनी ॥ २ ॥
बांधे देव तेंतीस करोरी । सुमिरतवंदि लोहगैतोरी ॥ ३ ॥
राजासुमिरै तुरियाचढ़ी । पंथीसुमिरि नामलैबढ़ी ॥ ४ ॥
अर्थ विहीनासुमिरैनारी । परजासुमिरैपुहुमीझारी ॥ ५ ॥
साखी ॥ वँदि मनाय फल पावहीँ, बँदि दिया सो देव ॥
कह कबीर ते ऊबरे, निशि दिन नामहिं लेव ॥ ६ ॥
बांधे अष्ट कष्ट नौ सूता । यमबांधे अंजनीके पूता ॥ १ ॥
अष्ट जे अष्टाङ्ग योगहैं औ कष्ट जो बिज्ञानहै तेहिते बांधिगयो धोखा ब्रह्म-
को बिज्ञानरूपकष्टहै तामें प्रमाण ॥ (अव्यक्ताहिगतिर्दुःखंदेहवद्भिरवाप्यते ) ॥
इतिगीतायां ॥ श्रेयःश्रुतिंभक्तिमुदस्यते विभो क्लिformat: क्लिश्यन्तियेकेवलबोधलब्धये । तें-