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जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary

वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished588 पृष्ठ

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५२० सटीकजातपारिजाते-
अथापसव्यवाक्यचक्रम्—
| घ=९ | न=१० | क्षे=११ | त्र=१२ | प=१ | रां=२ | ग=३ | मि=५ | व=४ | वृश्चिकः |
| ता=६ | सा=७ | द=८ | त्र=१२ | क्षु=११ | र्नि=१० | धि=९ | र्दा=८ | सा=७ | तुला |
| च=६ | र्मा=५ | भो=४ | गी=३ | रा=२ | य=१ | ध=९ | न=१० | क्षं=११ | कन्या |
| त्र=१२ | यो=१ | रा=२ | गी=३ | मा=५ | मे=४ | ता=६ | स=७ | ह=८ | सिंहः |
| त्र=१२ | क्षु=११ | र्नि=१० | धि=९ | र्दा=८ | स=७ | स्त=६ | मे=५ | व=४ | कर्कः |
| गि=३ | रा=२ | यु=१ | ध=९ | न=१० | क्ष=११ | त्र=१२ | प=१ | रः=२ | मिथुनं |
| गो=३ | मा=५ | वा=४ | ची=६ | स=७ | दा=८ | त्रि=१२ | क्षु=११ | ज्ञे=१० | वृषः |
| धी=९ | जः=८ | सि=७ | तो=६ | मि=५ | वां=४ | गा=३ | रि=२ | का=१ | मेषः |
| त्र=१२ | क्षु=११ | र्नि=१० | धि=९ | र्दा=८ | स=७ | स्त=६ | मे=५ | व=४ | मीनः |
| गि=३ | रा=२ | यु=१ | ध=९ | न=१० | क्ष=११ | त्र=१२ | प=१ | रः=२ | कुम्भः |
| गो=३ | मा=५ | वा=४ | ची=६ | स=७ | दा=८ | त्रि=१२ | क्षु=११ | ज्ञे=१० | मकरः |
| धी=९ | जः=८ | सि=७ | तो=६ | मि=५ | वां=४ | गा=३ | रि=२ | का=१ | धनुः |
अथ कालचक्रदशावर्षाणि ।
भूतैकविंशद्गिरयो नवदिक्पोडशाब्दयः ।
सूर्यादीनां क्रमाद्वदा राशीनां स्वामिनो वशात् ॥ १०६ ॥
इदानीं कालचक्रदशायां सूर्यादिग्रहाणां दशावर्षाण्युच्यन्ते-भूतैकेति । राशीनां स्वामिनो
वशात् सूर्यादीनां ग्रहाणां क्रमाद् भूतैकविंशद्गिरयो नवदिक्पोडशाब्दयः = ५, २१,
७, ९, १०, १६, ४, अब्दाः = वर्षाणि भवन्ति । अत्र राशीनां स्वामिनो वशादित्यनेन
यो ग्रहो यस्य राशेः स्वामी वर्तते तस्य राशेरपि ग्रहोक्तवर्षाणि दशामाननि भवन्तीति
ज्ञेयम् । तथा सति सिंहे सूर्यस्य = ५, कर्के चन्द्रस्य = २१, मेषवृश्चिकयोः भौमस्य = ७,
मिथुनकन्ययोः बुधस्य = ९, धनुर्मीनयोः गुरोः = १०, वृषतुलयोः शुक्रस्य = १६, मकरकु-
म्भयोः शनैश्चरस्य = ४ वर्षाणि कालचक्रदशामाननि भवन्तीति ॥ १०६ ॥
राशिस्वामीके वश सूर्यादि ग्रहोंके ५, २१, ७, ९, १०, १६ और ४ क्रमसे दशावर्ष हैं।
यह श्लोक इसी अध्यायमें ६ ठा कहा जा चुका है ॥ १०६ ॥
अथ राशिस्वामिवशेन ग्रहाणां कालचक्रदशावर्षचक्रम् ।
| ग्रहाः | सूर्यः | चन्द्रः | मङ्गलः | बुधः | गुरुः | शुक्रः | शनिः |
| राशयः | सिंहः ५ | कर्कः ४ | मेष-वृश्चि. १।८ | मिथुनकन्ये ३।६ | धनुर्मीनौ ९।१२ | वृष-तुले २।७ | मकर-कुंभी १०।११ |
| वर्षाणि | ५ | २१ | ७ | ९ | १० | १६ | ४ |
अथान्तर्दशाप्रकारः ।
दशां दशाब्दैः सङ्गुण्य सर्वायुः संख्यया हरेत् ।
लब्धमन्तर्दशा ज्ञेया वर्षमासदिनादिकाः ॥ १०७ ॥