जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)
Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary
वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३०६ सटीकजातपारिजाते-
अधुना चतुर्भिः श्लोकैः राशिफलान्युच्यन्ते । जन्मकाले चन्द्रो यस्मिन् राशौ भवति
तद्राशिफलं जातकस्य वाच्यमिति । श्लोकाः स्पष्टार्थाः ॥ ९२-९४ ॥
यदि मेष राशिमें चन्द्रमा हो तो जातक अल्प भोजन करनेवाला, कामी, भाइयोंमें
श्रेष्ठ हो। वृषमें हो तो दाता, सुन्दर, यशस्वी, दृढ़ जङ्घे तथा पैर वाला और कन्या सन्तान-
वाला हो। मिथुन राशिमें हो तो दीर्घायु, कामके उपचारमें कुशल और हास्यप्रिय हो।
कर्क राशिमें चन्द्रमा हो तो कायासक्त, घूमनेवाला, सुन्दर वचन बोलनेवाला हो ॥९२॥
सिंह राशिमें चन्द्रमा जन्म समयमें हो तो सुन्दर मुख, गम्भीर दृष्टि और सुखी हो।
चन्द्रमा कन्या राशिके होनेपर जन्म हो तो स्त्रियोंमें आतुर, ललित वचन, अधिक विद्या-
वाला और भोगवान् हो । जन्म समय तुलाराशिमें चन्द्रमा हो तो देव-ब्राह्मण-भक्ति
में लीन, बन्धुप्रिय और धनवान् हो । जन्म-समय वृश्चिक राशिस्थ चन्द्रमा हो तो प्रमत्त
हृदय, रोगी, लोभी और घूमनेवाला हो ॥ ९३ ॥
धनु राशिके चन्द्रमामें जन्म हो तो शुभाङ्ग, रुचिर दृष्टि, कुलश्रेष्ठ और शिल्पकर्म
जाननेवाला हो । मकर राशिके चन्द्रमामें गीत जाननेवाला, बड़े मस्तक वाला, ज्ञानी और
परस्त्रीगामी हो । कुम्भ राशिके चन्द्रमामें जातक शीलहीन, पण्डितोंका वैरी और अधिक
विद्यावाला हो । मीन राशिका चन्द्रमा हो तो श्रेष्ठ शरीर, विद्वान् और बहुत स्त्रियोंका
स्वामी होवे ॥ ९४ ॥
अथ राश्यंशफलम् ।
सेनानीर्धनवान् पिशङ्गनयनश्चोरश्च मेषांशके
पीनस्कन्धमुखांसकोऽसितवपुर्जातो वृषांशे विधौ ।
चार्वङ्गः प्रभुसेवको लिपिकरो युग्मांशके पण्डितः
श्यामाङ्गः पितृपुत्रसौख्यरहितश्चन्द्रे कुलीरांशके ॥ ६५ ॥
पीनाङ्गोन्नतनासिको धनबलख्यातश्च सिंहांशके
कन्यांशे मृदुभाषणः कृशतनुर्द्यूतक्रियाकोविदः ।
कामी भूपतिसेवकः सुनयनश्चन्द्रे तुलांशे स्थिते
कीटांशे विकलोऽधनः कृशतनुः सेवाऽटनो रोगवान् ॥ ६६ ॥
चापांशे कृशदीर्घबाहुतनुगस्त्यागी तपस्वी धनी
लुब्धः कृष्णतनुः सदारतनयश्चन्द्रे मृगांशे यदि ।
मिथ्यावादरतः स्वदारवशगः कुम्भांशगे शीतगौ
मीनांशे मृदुवागदीनवचनस्तीर्थाटनः पुत्रवान् ॥ ६७ ॥
अत्र मुखावगमैस्त्रिभिः श्लोकैर्नवांशफलान्युच्यन्ते । जन्मकाले चन्द्रो यत्र कुत्रापि
राशौ यस्मिन् नवांशे स्थितो भवेत्तत्फलमादेश्यं जातस्येति ॥ ६५-६७ ॥
मेष राशिके नवांशमें जन्म हो तो सेनापति, धनवान्, पीले नेत्रवाला और चोर होवे ।
वृष राशिके नवांशमें जन्म हो तो मोटे कंधे और मुखवाला हो और श्यामवर्ण
होवे । मिथुन राशिके अंशमें चन्द्रमा हो तो चार्वङ्ग ( सुन्दराङ्ग ), प्रभुकी सेवा करनेवाला,
लेखक और पंडित होवे । कर्कके अंशमें चन्द्रमाके होनेपर पैदा हो तो श्यामशरीर, पितृ-
पुत्र-सुखसे रहित होवे ॥ ६५ ॥
सिंह राशिके अंशमें चन्द्रमाके होनेपर बालक पैदा हो तो स्थूल शरीर, ऊंची नासिका,
धन-बलमें विख्यात हो । कन्यांशकमें चन्द्रमाके रहनेपर बच्चा पैदा हो तो कोमलवचन,
दुर्बल शरीर, द्यूत ( जुवा ) में निपुण होवे । तुला राश्यंशमें चन्द्रमाके स्थित होनेपर यदि
मनुष्यका जन्म हो तो कामी, राजाका सेवक, सुन्दर नेत्र वाला हो । वृश्चिकके अंशमें
चन्द्रमाके होनेपर बालकका जन्म हो तो वह विकल, दरिद्र, दुर्बल शरीर, त्यागी, तपस्वी
और धनी होवे ॥ ६६ ॥