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सर्वकोश
जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary

वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished588 पृष्ठ

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मान्द्यब्दादिफलाध्यायः ॥६॥ ३०५
कृत्तिकामें जन्म हो तो तेजवान्, प्रचुरसुहृद्, ज्ञानी और विचक्षणी हो। रोहिणीमें जन्म
होवे तो परच्छिद्रान्वेषी, कृशाङ्ग, ज्ञानी और परस्त्रीगामी होवे ॥ ८५ ॥
मृगशिरामें उत्पन्न हो तो सौम्यमन, यात्री, कुटिलदृष्टि, कामातुर और रोगी हो।
आर्द्रा में जन्म होनेसे दरिद्र, घूमनेवाला, विशेषवली, क्षुद्रकर्मी और शीलवान् हो। पुन-
र्वसुमें जन्म हो तो मूढ, धन-बलमें मशहूर, कवि और कामी हो। पुष्य नक्षत्रमें जन्म हो
तो ब्राह्मण-देवताका प्रिय, धन-बुद्धि-वाला, राजाका प्रिय और बन्धु (परिवार)
वाला हो ॥ ८६ ॥
श्लेषा नक्षत्रमें जन्म हो तो मोटी बुद्धि, कृतघ्नवचन, कोपी, आचारवान् हो। मघानक्षत्र
में जन्म हो तो अहङ्कारी, पुण्यमें लीन, स्त्रीके वश, मानी और धनी हो। पूर्वाफाल्गुनीमें
जन्म हो तो चपल, कुलमें वरिष्ठ, त्यागी और दृढ कामी हो। उत्तराफाल्गुनीमें जन्म लेने
वाला भोगी, मानी, कृतज्ञ और पण्डित होवे ॥ ८७ ॥
हस्त नक्षत्रमें जिसका जन्म हो वह काम-धर्ममें रत, प्राज्ञ, उपकारी और धनी होवे।
चित्रा जन्मर्क्ष हो तो अत्यन्त गुप्त शीलमें रत, मानी और स्त्री-रत हो। स्वातीमें जन्म हो
तो देव-ब्राह्मणका प्रिय करनेवाला, भोगी, धनी और मन्द बुद्धि हो। विशाखामें जन्म हो
तो अहङ्कारी, स्त्रीके वशीभूत, शत्रुजित् और विशेष क्रोधी होवे ॥ ८८ ॥
अनुराधा नक्षत्रमें जन्म हो तो सुन्दर-प्रिय वचन बोलनेवाला, धनी, सुखमें रत, पूज्य,
यशस्वी और विज्ञ होवे। ज्येष्ठा में जन्म हो तो विशेष कोप करनेवाला, परस्त्रीगामी, विज्ञ,
और धर्मात्मा होवे। मूल नक्षत्रमें जन्म हो तो चतुर वचन बोलनेवाला, खूब कुशल, धूर्त,
कृतघ्न और धनी होवे। पूर्वाषाढमें जन्म हो तो वह बालक विकारी, मानी, सुखी और
शांत बुद्धिवाला होवे ॥ ८९ ॥
उत्तराषाढमें जन्म हो तो मान्य, शान्तगुण, सुखी, धनवान् और पण्डित हो। श्रवणमें
जन्म हो तो द्विज-देवकी भक्तिमें निरत, राजा, धनी और धर्मवान् हो। धनिष्ठामें उत्पन्न
हो तो आशावान्, धनवान्, मोटे ऊरु-कण्ठवाला और सुखी हो। शतभिषाका उत्पन्न
बालक कृशाङ्ग, शान्त, अल्पभोजी और साहसी हो ॥ ९० ॥
पूर्वाभाद्रपद नक्षत्रका उत्पन्न बालक तेज वचन बोलनेवाला, धूर्त, अयातं और
कोमल होता है। उत्तराभाद्रपद नक्षत्रका जायमान कोमलगुणी, त्यागी, धनी और पण्डित
होवे। रेवतीमें उत्पन्न मनुष्य धर्ममें विद्वान्, कामातुर, मन्त्री, पुत्र-स्त्री-मित्रसे युक्त,
स्थिर और धीरज होवे ॥ ९१ ॥
अथ राशिफलम् ।
मेषस्थे यदि शीतगौ च लघुभुक् कामी महोत्थाग्रजो
दाता कान्तयशोचनोरुचरणः कन्याप्रजो गोगते ।
दीर्घायुः सुरतोपचारकुशलो हास्यप्रियो युग्मके
कामासक्तमनोऽटनः सुवचनश्चन्द्रे कुलीरस्थिते ॥ ९२ ॥
सिंहस्थे पृथुलोचनः सुवदनो गम्भीरदृष्टिः सुखी
कन्यास्थे विषयातुरो ललितवाग्विद्याधिको भोगवान् ।
तौलिस्थेऽमरविप्रभक्तिनिरतो बन्धुप्रियो वित्तवान्
कीटस्थे शशिनि प्रमत्तहृदयो रोगी च लुब्धोऽटनः ॥ ९३ ॥
सौम्याङ्गो रुचिरैक्षणः कुलवरः शिल्पी धनुःस्थे विधौ
गीतज्ञः पृथुमस्तको मृगगते शाली परस्त्रीरतः ।
कुम्भस्थे गतशीलवान् बुधजनद्वेषी च विद्याधिको
मीनस्थे मृगलाञ्छने वरतनुर्विद्वान् बहुस्त्रीपतिः ॥ ९४ ॥