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जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary

वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished588 पृष्ठ

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२५० सटीकजातपारिजाते-
मित्रग्रहनवांशस्वराशीनामन्यतमोपगताः
सौम्याः, कलत्रपुत्रारिगृहेषु=सप्तम-पञ्च-
म-षष्ठभावेषु स्थिता भवेयुः, मित्रोच्चसं-
स्थाः=स्वमित्रग्रहराशिषु वा व्यवस्थिता
असौम्याः=पापा यदि तृतीय-लाभोदय-
गाः=तृतीयैकादशलग्नगता भवेयुस्तदा
कूर्मयोगो भवति । तत्फलं च विख्यात-
कीर्तिरित्थनेन सरलार्थकेनोक्तमिति ॥
यदि अपने उच्चका, वा मित्रांश, वा स्वकीय राशिका शुभग्रह सप्तम, पञ्चम और षष्ठ-
गृहमें हों और पाप ग्रह तृतीय, लाभ और लग्नमें अपने मित्रगृह या उच्चमें हो तो "कूर्म"
योग होता है ॥ १४८ ॥
कूर्म योगमें उत्पन्न जातक पृथ्वीपर विख्यात कीर्तिवाला, राज-सुखका भोगी, धर्मात्मा,
सात्विक गुणवाला, धैर्यवान्, सुखी, वक्ता, परोपकारी, या मनुष्योंका नायक ( राजा )
होता है ॥ १४९ ॥
अथ खड्गयोगः ।
भाग्येशे धनभावस्थे धनेशे भाग्यराशिगे ।
लग्नेशे केन्द्रकोणस्थे खड्गयोग इतीरितः ॥ १५० ॥
वेदार्थशास्त्रनिखिलागमतत्त्वयुक्तियुग्बुद्धिप्रतापबलवीर्यसुखानुरक्तः ।
निर्मत्सरश्च निजवीर्यमहानुभावः खड्गे भवन्ति पुरुषाः कुशलाः कृतज्ञाः ॥१५१॥
इदानीं सरलार्थेन श्लोकेन खड्गयो-
गं, तत्फलं स्पष्टार्थमाह-भाग्येश इति ॥
यदि भाग्येश धन भावमें हो, धनेश
भाग्य राशिमें हो और लग्नेश केन्द्र या
कोणमें स्थित हो तो खड्ग योग होता है॥
इस खड्ग योगमें उत्पन्न जातक वेद
के अर्थ को जाननेवाला, सभी शास्त्रों तथा
ज्योतिष और तन्त्रोंके तत्त्वको जाननेवाला
हो । वह बुद्धि, प्रताप, बल तथा पराक्र-
मसे सुखी रहे । मत्सरता रहित और अपने पराक्रमसे श्रेष्ठ हो । खड्गयोगमें उत्पन्न पुरुष
कार्यकुशल, तथा कृतज्ञ होता है ॥ १५१ ॥
अथ लक्ष्मीयोगः ।
केन्द्रे मूलत्रिकोणस्थे भाग्येशे परमोच्चगे ।
लग्नाधिपे बलान्ध्ये च लक्ष्मीयोग इतीरितः ॥ १५२ ॥
गुणाभिरामो बहुदेशनाथो विद्यामहाकीर्तिरनङ्गरूपः ।
दिगन्तविश्रान्तनृपालवन्द्यो राजाधिराजो बहुदारपुत्रः ॥ १५३ ॥