जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Jataka Kathayen (Authentic Hindi Translation from Pali)
भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक द्वारा
स्रोत: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (उद्गम)
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महापिङ्गल ] ४३१
दड्ढो वाहसहस्सेहि सित्तो घटसतेहि सो,
परिक्खता च सा भूमि मा भायि नागमिस्सति ॥
[ हजार भारो से जला दिया गया है। सैकडो घडो से (चिता) ठडी कर
दी गई है। वह भूमि खन दी गई है। मत डर, वह नही आएगा। ]
तब द्वारपाल को सन्तोष हुआ। बोधिसत्त्व धर्म से राज्य करके दान
आदि पुण्य कर यथाकर्म (परलोक) गए।
शास्ता ने यह धर्मदेशना ला जातक का मेल बैठाया। उस समय पिङ्गल
देवदत्त था। पुत्र तो मै ही था।