जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Jataka Kathayen (Authentic Hindi Translation from Pali)
भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक द्वारा
स्रोत: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (उद्गम)
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भोजन के कारण मच्छो का पीछा करता हुआ लोभवश मारा गया है।]
काम निश्चय से। यहि इच्छसि तेन गच्छ जहां चाहे वहाँ जा। मम्मम्हि
मर्म स्थान मे। विक्कण्णकेन उल्टी नोक वाले शल्य से। हतोसि भत्तेन
स्वादसितेन लोलो च मच्छे अनुबन्धमानो तू नगाडा बजाकर भात दिए जाते
समय लोभी बन खाने के लिए मच्छो का पीछा करता हुआ उस स्वादिष्ट
भोजन द्वारा मारा गया। जाने की जगह भी तू जीवित नही रहेगा।
यह अपने वासस्थान पर पहुँच कर मर गया। शास्ता ने यह बात कह,
अभिसम्बुद्ध होने पर दूसरी गाथा कही—
एवम्पि लोकाभिस ओपतन्तो
विहञ्ञती चित्तवसानुवत्ती;
सो हञ्जति ञातिसखानमज्झे
मच्छानुगो सोरिव सुसुमारो ॥
[इस प्रकार लौकिक लाभ के पीछे भागता हुआ, अपने चित्त के वशीभूत
आदमी मारा जाता है। वह रिश्तेदारो और दोस्तो के बीच वैसे ही मारा जाता
है जैसे मच्छो का पीछा करने वाला मगरमच्छ।]
लोकाभिस पांच विषय। उन्हें ससार इष्ट, कान्त तथा सुन्दर समझ
ग्रहण करता है, इसलिए लोकाभिस कहलाते है। ओपतन्तो उन लौकिक
चीजो के पीछे भागता हुआ राग के वशीभूत आदमी विहञ्जति कष्ट पाता
है। सो हञ्जति इस प्रकार का वह आदमी रिश्तेदारो तथा मित्रो के बीच
म भी सो तीर से बिंधे मच्छानुगो सुसुमारो विय पाँच विषयो को सुन्दर मानकर
हञ्जति कष्ट पाता है, महाविनाश को प्राप्त होता है।
इस प्रकार शास्ता ने यह धर्मदेशना ला, (आर्य-)सत्यो को प्रकाशित
कर जातक का मेल बैठाया। सत्यो के प्रकाशन के अन्त म उत्कण्ठित भिक्षु
स्रोतापत्तिफल में प्रतिष्ठित हुआ।
उस समय वाराणसी राजा मै ही था।