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सर्वकोश
हितोपदेशः (हिन्दी अनुवाद सहित)

हितोपदेशः (हिन्दी अनुवाद सहित)

नारायण पण्डित द्वारा

स्रोत: हितोपदेशः (हिन्दी अनुवाद सहित) · चौखम्बा विद्याभवन · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished302 पृष्ठ

पृष्ठ 272, कुल 302 में से

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पृष्ठ 272

गई । तब ब्राह्मणके लिये राजाका पार्वणश्राद्ध करनेके लिये बुलावा आया. यह
सुन कर ब्राह्मणने जन्मके दरिद्री होनेसे सोचा कि 'जो मैं शीघ्र नहीं जाऊं तो
दूसरा कोई सुन कर श्राद्धका आमंत्रण ग्रहण कर लेगा.
यतः,—
आदानस्य प्रदानस्य कर्तव्यस्य च कर्मणः ।
क्षिप्रमक्रियमाणस्य कालः पिबति तद्रसम् ॥ ९४ ॥
क्योंकि—शीघ्र नहीं किये गये–लेने, देने और करनेके–कामका रस समय
पी लेता है ॥ ९४ ॥
किंतु बालकस्यात्र रक्षको नास्ति, तत्किं करोमि ? यातु, चिर-
कालपालितमिमं नकुलं पुत्रनिर्विशेषं बालकरक्षायां व्यवस्थाप्य
गच्छामि ।' तथा कृत्वा गतः । ततस्तेन नकुलेन बालक समीपमा-
गच्छन् कृष्णसर्पो दृष्ट्वा व्यापाद्य कोपात्खण्डं खण्डं कृत्वा
खादितः । ततोऽसौ नकुलो ब्राह्मणमायान्तमवलोक्य रक्त-
विलिप्तमुखपादः सत्वरमुपागम्य तच्चरणयोर्लुलोठ । ततः स
विप्रस्तथाविधं तं दृष्ट्वा 'बालकोऽनेन खादितः' इत्यवधार्य नकुलं
व्यापादितवान् । अनन्तरं यावदुपसृत्यापत्यं पश्यति ब्राह्मण-
स्तावद्बालकः सुस्थः सर्पश्च व्यापादितस्तिष्ठति । ततस्तमुपकारकं
नकुलं निरीक्ष्य भावितचेताः स परं विषादमगमत् । अतोऽहं
ब्रवीमि—"योऽर्थतत्त्वमविज्ञाय" इत्यादि ॥
परन्तु बालकका यहां रक्षक नहीं है, इसलिये क्या करूं ? जो हो, बहुत
दिनोंसे पुत्रसेभी अधिक पाले हुये इस नेवलेको पुत्रकी रक्षाके लिये रख कर
जाता हूं ।' वैसा करके चला गया. फिर वह नेवला बालकके पास आते हुए काले
साँपको देख कर, उसे मार कोपसे टुकड़े टुकड़े करके ( मार कर ) खा गया । फिर
वह नेवला ब्राह्मणको आता देख लोहूसे भरे हुए मुख तथा पैर किये शीघ्र पास
आ कर उसके चरणों पर लोट गया. फिर उस ब्राह्मणने उसे वैसा देख कर "इसने
बालकको खा लिया है" ऐसा समझ कर नेवलेको मार डाला. पीछे ब्राह्मणने
जब बालकके पास आ कर देखा तो बालक आनंदमें है और सर्प मरा हुआ
पड़ा है । फिर उस उपकारी नेवलेको देख कर मनमें घबरा कर बड़ा दुःखी
हुआ; इसलिये मैं कहता हूं, "जो बातके भेदको न जान कर" इत्यादि.