हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहिन्दुत्वके तीन लक्षण ८३
सकता है कि आप लोगोंमें एक ही रक्त प्रवाहित हो रहा है?" इस
प्रश्नका उत्तर हम यह प्रतिप्रश्न करके ही दे सकते हैं कि, "क्या
अंग्रेज एक जाति हैं ? आंग्ल रक्त, फ्रेंच रक्त, जर्मन रक्त या
चोनो रक्त नामकी भी कोई चीज दुनियामें है ?" जो लोग दूसरी
दूसरी जातियोंसे विवाह-सम्बन्ध करके दूसरी जातियोंका रक्त
अपने अन्दर ले आते हैं वे क्या कभी एक रक्त होनेका दावा कर
सकते हैं और एक जाति कहला सकते हैं? यदि वे ऐसा कर
सकते हैं तो हिन्दू तो सिर ऊंचा करके और भी जोरके साथ ऐसा
कह सकते हैं । कारण, जिस जाति-भेदका यथार्थ स्वरूप आप
लोगोंने अभीतक नहीं समझा, जिसका वास्तविक अर्थ अभी-
तक आप लोगोंकी समझमें नहीं आया, उस जाति-भेदसे आप
लोग कहते हैं कि हिन्दू-जातिमें अलग अलग रक्त-प्रवाह जहांके
तहां ही रुके रहे, उनका परस्पर मिश्रण नहीं हुआ; परन्तु आपके
ध्यानमें यह बात नहीं आती कि उस जाति-भेदने अपने रक्तकी
अपेक्षा दूसरोंका रक्त हमारे अन्दर न आने देनेका ही अधिक
काम किया है। यही नहीं, बल्कि इन अलग अलग जातियोंके
अस्तित्वसे ही क्या यह बात सिद्ध नहीं होती कि ब्राह्मणसे
चांडालतक संपूर्ण हिन्दू जातिमें एक ही रक्त प्रवाहित हो रहा
है ? सरसरी निगाहसे भी अपनी किसी भी स्मृतिका अवलोकन
करनेसे यह मालूम हो जाता है कि किसी समय अनुलोम और
प्रतिलोम विवाह हुआ करते थे और उन्हींसे आज जो इतनी
जातियां दिखायी देती हैं, उत्पन्न हुई हैं। यदि किसी शूद्रा