हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[Header] हिन्दुत्वके तीन लक्षण ८१
ी है, तौभी यदि हम किसी हिन्दुस्थानवासी मुसलमानको हिन्दू
हेंगे तो इस शब्दके प्रयोगकी व्याप्ति इतनी खिंच जाती है कि
ह वहीं टूट जाती है, अर्थका अनर्थ हो जाता है। यह हो सकता
ै कि भविष्यत्में कोई ऐसा समय आ जाय जब हिन्दू शब्दका
अर्थ केवल हिन्दुस्थानी या हिन्दुस्थानवासी ही रह जाय। पर
ह दिन तभी उदय होगा जब सांप्रदायिक अहङ्कारकी परापहारी
ौतानी सेना नष्ट भ्रष्ट हो जाय और संप्रदायधर्म उन सनातन
सेद्धान्तोंके अधीन होकर रहें जो सबके समान रूपसे आधार-
भूत सिद्धान्त हैं, जिनकी बुनियादपर ही मनुष्य-समाज सुस्थिर
ह सकता है। परन्तु जबतक इस परम वांछनीय, सर्वसमाज-
सुख-साधक एकीकरणके प्रथम किरणोंका भी क्षितिजपर कोई
चेह्न नहीं दिखायी देता तबतक वस्तुस्थिति जो जैसी है उसकी
उपेक्षा करना केवल मूर्खता है। जबतक और दूसरे धर्म-संप्र-
दाय अपने ऐसे मतोंको नहीं छोड़ देते जिनके कारण बार बार
युद्ध होनेकी नौबत आती है तबतक कोई सांस्कृतिक या राष्ट्रीय
संघ अपने बन्धनोंको-खासकर उन बन्धनोंको जिनसे संघकी
अखण्डता और सामर्थ्य बढ़ती है—कभी ढीले नहीं कर सकता।
कोई अमेरिकन भी भारतका नागरिक बन सकता है। यदि वह
यथार्थमें भारतीय नागरिक बने तो उसे हम भारतीय या हिन्दु-
स्थानी कह सकते हैं, अपना देशवासी मानकर उसके साथ वैसा ही
व्यवहार कर सकते हैं। परन्तु हमारे देशको अपनानेके साथ साथ
जबतक वह हमारी संस्कृति और इतिहासको भी नहीं अपनाता,
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