हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें८०, हिन्दुत्व
हो सकता है जब वह स्वयं या अपने हिन्दुस्थानवासी पूर्वजोंके
उत्तराधिकारी होनेके नाते, हिन्दुस्थानका नागरिक हो और इस
देशको अपनी मातृभूमि समझता हो । फ्रांस, अमेरिका आदि
देशोंमें हिन्दू शब्द ठीक इसी अर्थसे व्यवहृत होता है। उसमें
धार्मिक या सांस्कृतिक अर्थकी ध्वनि नहीं होती और सिन्धु
शब्दसे निकले हुए अन्य शब्दोंकी तरह यदि यह "हिन्दू" अपने मूल
अर्थका ही वाचक रहने दिया जाता, उसमें और कोई नवीन
अर्थ न आने दिया जाता तो हिन्दू शब्दका एकमात्र अर्थ हिंदु-
स्थानका नागरिक ही होता और कुछ नहीं, जैसा कि गुजरात
और महाराष्ट्रमें "हिंदी" शब्दका अर्थ है ।
परन्तु हम यहां जो अनुसन्धान कर रहे हैं वह इस बातका
नहीं कि किस शब्दका क्या अर्थ होता या होना चाहिये था बल्कि
इस बातका अनुसन्धान कर रहे हैं कि वस्तुस्थिति क्या है । क्या
होना चाहिये, इसका विचार करनेमें कोई अनौचित्य हो यह बात
नहीं, बल्कि यह समझिये कि इसका विचार करना भी अत्यन्त
आवश्यक है, उपस्थित विषयसे भी अधिक उत्साहप्रद है; परन्तु
उसके लिये पहले यह जानना होगा कि अभी क्या है। अभी क्या
है, यह अच्छी तरह जाननेसे आगे क्या होना चाहिये इसका
विचार किया जा सकता है। इसलिये बड़ी सावधानीके साथ
ही हमें "हिन्दुत्व क्या है" यह समझनेके लिये इस बातकी जांच
करनी होगी कि इस शब्दमें क्या क्या भाव भरे हुए हैं। इसलिये
यद्यपि हिन्दू शब्दका मूल अर्थ "हिन्दो" के समान "हिन्दुस्थानी"