हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहिन्दुत्वके तीन लक्षण ,७६
वृद्धि हुई। हिन्दू और हिन्दुस्थान इन नामोंका यह दैशिक अर्थ इन
नामोंके साथ यदि अधिक नहीं तो कमसे कम ५००० वर्ष से
बराबर चला आ रहा है और “हिन्दुस्थान” शब्दसे सिन्धु नदीसे
सिन्धु (समुद्र) पर्यन्तके समग्र देशका बोध होता रहा है। किसी
जातिके लोगोंमें परस्पराकर्षण, सामर्थ्य और ऐक्यभाव होनेके
लिये जो सबसे बड़ी बात जरूरी होती है वह यही है कि उनका
ऐसा वासस्थान हो जो अन्दरसे सुसम्बद्ध और बाहर सीमा-
बद्ध हो, और उस वासस्थानका ऐसा नाम हो जिसका उच्चा-
रण करते ही मातृभूमिकी दिव्य मूर्त्ति और पूर्व पुरुषोंकी गौरव-
मय परम्परा एक साथ नेत्रोंके सामने खड़ी हो जाय। किसी
शक्तिशाली और एकीभूत राष्ट्रके लिये ये जो दो आवश्यकताएं
होती हैं, सौभाग्यसे ये दोनों हमें प्राप्त हैं। हमारा देश इतना
विशाल होनेपर भी ऐसा सुसंघटित है, दूसरे देशोंसे उसका
पार्थक्य इतना सुस्पष्ट है और साथ ही इतनी शक्तिके साथ सुर-
क्षित है कि संसारमें कोई ऐसा देश प्रकृति देवीने नहीं निर्माण
किया जिसकी दैशिक एकता इससे अधिक स्पष्ट और अखण्ड
हो। इसका नाम 'हिन्दुस्थान' या 'हिन्दू' भी वैसा ही है। इस
नामको लेते ही हमारे नेत्रोंके सामने अपनी मातृ-भूमिकी प्रतिमा-
खड़ी हो जाती है और यह नाम उसके सब दैशिक और प्राकृतिक
रूप सामने उपस्थित कर उसे एक जीती-जागती प्रतिमा बना
देता है। हिन्दुस्थानका अर्थ हिन्दुओंका देश होनेसे हिन्दुत्वका
प्रथम मूलतत्व यही दैशिक होना चाहिये। कोई हिन्दू तभी हिन्दू