सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 89, कुल 167 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 89

हिन्दुत्वके तीन लक्षण ७३
इस नामको छोड़ सकें और कोई नया राष्ट्रीय नाम निर्माण करें ?
इस समय तो यही बात है कि "हिन्दू" शब्द हमारी जातिका
मानो झंडा ही बन बैठा है और यही एक ऐसी बात है जो कन्या-
कुमारीसे काश्मीरतक और अटकसे लेकर कटकतक हमारी
जातीय एकताको सबसे अधिक बल प्रदान करती और उसे दृढ़
करती है। क्या आप यह संभव समझते हैं कि इस नामको हम
इतनी आसानीसे बदल, सकते हैं जैसे कोई अपने सिरकी टोपी
बदल दे ? एक बारकी घटना है कि एक सज्जन मर्दुमशुमारीकी
रिपोर्टमें अपने आपको हिन्दू न लिखा कर "आर्य" लिखाना
चाहते थे; क्योंकि उनके सिरपर भ्रमका यह भूत सवार हुआ था
कि "हिन्दू" नाम घृणामूलक है और यह मुसलमानोंने रखा है
और इसका अर्थ चोर और काला आदमी है। समय न होनेसे
मैं उनके साथ बहुत बहस तो नहीं कर सका, पर मैंने उनसे
एक ही प्रश्न किया। पूछा, "आपका नाम क्या है ?" जवाब मिला
"तख्त सिंह"। तब मैंने कहा, भले आदमी ! पहले अपने नामको
तो देखो। हिन्दू शब्द तो ज्यादासे ज्यादा विवादग्रस्त शब्द
है, पर आपका नाम तो बिना किसी सन्देहके संकरी सृष्टि है और
इसलिये पहले यह नाम बदलकर कोई शुद्ध प्राचीन आर्य नाम
रखिये—जैसे मौद्गालायन या सिंहासनसिंह । तब बात छोड़कर
उन्होंने यह बतलाना आरंभ किया कि नाम बदलनेसे अर्थोपार्ज-
नका सारा कारबार ही उलट-पलट जायगा और फिर जब दुनिया
तख्तसिंह ही कहती रही तो हमारे सिंहासनसिंह घरमें ही बने