हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
पृष्ठ 88, कुल 167 में से
संदर्भ में पढ़ें७६ हिन्दुत्व
देशके सुप्रसिद्ध यात्री युआन चंगने “हिन्दू” नामका जो अर्थ
किया है, उसे जानकर कोई भी हिन्दू आत्मगौरव बोध किये बिना
न रहेगा। इसने “हिन्दू” शब्दको “इन्दु” शब्दसे मिलाया है
और कहा है कि संसार इस जातिको जो इन्दु (चन्द्रमा) कहता
है, वह ठीक ही है; क्योंकि यह जाति और इसकी संस्कृति,
चंद्रमाके समान, दुःख-संतप्त मनुष्यके मनको सदा शांति, शीतलता
और आनन्द देनेवाली है। क्या इन बातोंसे यह स्पष्ट नहीं
होता कि अपने नामका आदर उत्पन्न करनेका मार्ग उस नामको
छोड़ देना या उससे इन्कार करना नहीं बल्कि अपने शस्त्रके
तेजसे, अपने उद्देश्यकी पवित्रतासे तथा अपनी उदात्त संस्कृतिसे
संसारको विवश करना है कि वह उस नामके सामने सम्मानके
साथ नतमस्तक हो। अब हम लोगोंमेंसे कुछ लोग अपना
हौसला पूरा करनेके लिये मर्डु मशमारीकी रिपोर्टोंमें अपने आपको
“हिन्दू” न लिखाकर भले ही “आर्य” लिखायें; पर इससे होगा
क्या सिवा इसके कि “आर्य” शब्दको भी ऊपरसे नीचे खींच लावें
और शब्दकोषमें दासार्थवाची शब्दोंमें एक शब्द और बढ़ा दें ?
—जबतक हमारा राष्ट्र यथार्थमें उस प्राचीन आर्यगौरव और
आर्यतेजको नहीं प्राप्त कर लेता।
परंतु यदि हम हिन्दु या हिन्दुत्व, इन नामोंको त्याग देनेके
बेमतलब प्रस्तावपर गंभीरताके साथ कुछ भी विचार न करें
और यह मूखतापूर्ण बात भी मान लें कि विदेशियोंने ही
द्वेषबुद्धिसे हमारा यह नाम रखा तौभी क्या यह संभव है कि हम