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सर्वकोश
हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 87, कुल 167 में से

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पृष्ठ 87

हिन्दुत्वके तीन लक्षण ७१
जानना चाहिये कि हिन्दू भी "मुसलमान" शब्द सदा भले आदमी-
का ही वाचक नहीं समझते थे । किसीको "मुसलमान" या
"मुसल्ला" कह देना उसे पशु कहनेसे भी बढ़कर गाली देना
था । जिस समय दो राष्ट्रोंके बीच जीवन-मृत्युका संग्राम
छिड़ता है उस समय इस तरह एक दूसरेको कोसना, गाली
देना चाहे अनिवार्य हो, पर ये बातें तब भूल जानी चाहिये जब
मनुष्य होशमें आकर भले आदमी कहलाना चाहते हैं। यह बात
भी भूलनेकी नहीं है कि प्राचीन यहूदी लोग "हिन्दू" शब्दसे बल
और तेजका अर्थ ग्रहण करते थे अर्थात् हमारे देश और राष्ट्रमें
ये गुण थे । "सोहाब मो अलक" नामक एक अरबी महाकाव्यमें
यह लिखा है कि, "घरवालोंके अत्याचार तो एक हिन्दूकी तल-
वारके प्रहारसे भी अधिक प्रखर और भीषण होते हैं" ; और
"हिन्दूकी तरह जवाब देना" यह कहावत तो ईरानियोंमें प्रसिद्ध
ही है, जिसका मतलब "हिन्दुस्थानी तलवारसे और दिलेरीके
साथ गहरा जखम करना" है । बाबीलान देशके लोग सबसे
अच्छे कपड़ेको "सिन्धु" कहा करते थे; क्योंकि ऐसा कपड़ा
प्रायः सप्तसिन्धुसे ही उन्हें मिलता था और इससे भी यह जाहिर
है कि ये लोग भी हमारे इस प्राचीन सिन्धु नामसे परिचित थे ;
और बाबिलानकी भाषामें इस शब्दका जो राष्ट्रीय अर्थ है उसके
सिवाय और कोई दूसरा अर्थ भी है, यह हमने अबतक नहीं
सुना ।
अपने पड़ोसके अत्यन्त प्राचीन और अत्यंत सुसंस्कृत चीन