हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमुसलमानां या मुसलमान ईरानियोंका पता भी नहीं था और
इसलिये जहां हिन्दू शब्दका इतना गौरव है और वह इतना हमारे
प्रेमका अधिकारी है, वहां इस बातका महत्व ही क्या है कि कोई
ऐरेगैरे दीवाने इस नामको अपमानसूचक मानते हैं या क्या
करते हैं । एक समय था जब खास इङ्गलैण्डमें "इङ्गलैण्ड" नाम
उसके नार्मन विजेताओंकी नजरोंमें इतना गिर गया था कि
वह एक दूसरेको गाली देनेके काम आता था । "क्या मैं अंगरेज
हूँ" यह कहना अपनी घोर भर्त्सना करना था "तुम अंगरेज हो"
यह किसी नार्मनको कहना अक्षम्य अपराध समझा जाता था ।
पर क्या इससे अंगरेजोंने अपने देश और राष्ट्रका नाम बदल दिया
और उसे "इङ्गलैण्ड"के बदले "नारमंडी' कहना शुरू किया ? और
क्या "इङ्गलैण्ड" या "अङ्गरेज" नाम त्याग कर देनेसे वे बड़े हो
जाते ? कदापि नहीं, प्रत्युत इसके विपरीत उन्होंने अपने पूर्वजोंके
रक्त और नामका उत्तराधिकार नहीं छोड़ा, इसीसे आज हम देखते
हैं कि जहां "नार्मन" शब्द और नार्मन देशका कहीं पता भी
नहीं है, वहां अंगरेज जाति और अंगरेजी भाषाने संसारमें
अपना सबसे महान् साम्राज्य स्थापित कर लिया है। अंगरेजी
साम्राज्यका वैभव निश्चय ही महान् है, पर हिन्दू साम्राज्यके
वैभवके सामने वह क्या चीज है !
लड़ाई-झगड़ोंके समय राष्ट्रोंका मन स्थिर नहीं रहता और
ऐसे समय यदि फारसवाले तथा अन्य लोग "हिन्दू" शब्दका
अर्थ "चोर" या "काला आदमी" ही मान बैठें, तो उन्हें यह भी