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सर्वकोश
हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 84, कुल 167 में से

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पृष्ठ 84

६८ हिन्दुत्व
तिरस्कारसूचक होता तो क्या हमारी जातिके श्रेष्ठ और वीर
पुरुष इसे कदापि ग्रहण करते ? हमारी जातिके लोगोंको निश्चय
ही अरबी, फारसी अपरिचित नहीं थी ! मुसलमान हमें काफिर
भी कहा करते थे, पर यह नाम क्या कभी हिन्दुओंने ग्रहण
किया ? यदि नहीं तो हिन्दुस्थान और हिन्दू, इन शब्दोंके
बारेमें ही यह राष्ट्रीय अपमान उन्होंने क्यों स्वीकार किया ?
बहुतसे लोग यह कहा करते हैं कि “हिन्दु” शब्द संस्कृतमें नहीं
है । ठीक है, पर “हिन्दु” ही क्यों, बहुतसे शब्द हैं जो
संस्कृतमें नहीं हैं पर नित्य जिनका प्रयोग हम करते हैं । जैसे
बनारस, मराठा, सिख, गुजरात, पटना इत्यादि । पर क्या ये शब्द
यहां बाहरसे आये हैं ? 'बनारस' शब्द संस्कृतमें नहीं है, फिर
भी वह हमारा है और संस्कृतके “वाराणसी” शब्दका केवल
प्राकृत रूप है । सच तो यह है कि किसी प्राकृत शब्दको हम शुद्ध
संस्कृतमें ढूंढने लगें यही मूर्खता है । फिर भी, यह प्राकृत शब्द
होनेपर भी, किसी किसी संस्कृत ग्रन्थमें यह शब्द मिलता है ।
इसे इस शब्दके महत्त्वका ही प्रबल प्रमाण समझना चाहिये ।
उदाहरणार्थ, मेरुतंत्रमें यह शब्द आता है। महाराष्ट्रके सुप्रसिद्ध
कोषकार आपटे और बंगालके तारानाथ तर्कवाचस्पतिने अपने
कोषोंमें इसका हवाला दिया है। और “शिव शिव न हिन्दुर्नय-
वनः” यह वचन तो इतना प्रसिद्ध है कि उसका उल्लेख करनेकी
भी आवश्यकता नहीं ।
यह हो सकता है कि आधुनिक मुसलमानी फारसी भाषामें