हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
पृष्ठ 83, कुल 167 में से
संदर्भ में पढ़ें( ५ )
हिन्दुत्वके तीन लक्षण
इस प्रकार वैदिक कालसे लेकर सन् १८१८ ई० में हमारे
अन्तिम हिन्दू साम्राज्यके अन्ततक हिन्दू और हिन्दुस्थान, इन
शब्दोंके इतिहासके भिन्न भिन्न प्रकरण देखनेके बाद अब हम यह
विचार कर सकते हैं कि हिन्दुत्वके लक्षण क्या हैं। सबसे
पहली बात जो मालूम होती है, वह यह है कि हमारे अनेक देश-
वासियोंकी जो एक धारणा हो गयी है कि "हिन्दु" और "हिन्दु-
स्थान" की उत्पत्ति मुसलमानोंके द्वेषभावसे हुई है—वह बिलकुल
ही गलत है। अबतक इस विषयमें पिछले परिच्छेदोंमें जो कुछ
कहा गया है उससे यह स्पष्ट है कि यह धारणा केवल मूर्खता-
पूर्ण है। जिस समय महम्मदका जन्म भी नहीं हुआ था, जिस
समय अरबोंकी कोई जाति भी नहीं पैदा हुई थी, उस समय यह
प्राचीन राष्ट्र सिंधु या हिंदु नामसे विख्यात था। हम लोग इसी
नामसे इसे पुकारते थे और बाहरवाले भी इसका यही नाम जानते
थे। अरबोंने यह नाम नहीं ढूंढ़ निकाला। प्रत्युत उन्होंने ईरानि-
यों, यहूदियों और अन्य जातियोंसे यह नाम जाना। परन्तु इन
ऐतिहासिक बातोंको छोड़कर भी यदि हम विचार करें तो क्या
यह समझना कुछ कठिन है कि यदि यह नाम वास्तवमें