हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६६ हिन्दुत्व
किसको कैसी नजर लगेगी, नहीं मालूम ! अबतक जो हुआ
हैं, वह केवल देशपर अधिकार, राज्यप्राप्ति यही नहीं है प्रत्युत
वेदशास्त्ररक्षण, गो-ब्राह्मण-प्रतिपालन, सार्वभौमत्व और
कीर्तियशके डंकेका बजना, ये बातें हैं। इन सबकी रक्षा करना
आपका और पाटिल बुवाका काम है। इसमें यदि बाधा पड़ी
तो शत्रु बलवान हो जायगा। संशय दूर हुआ। बहुत अच्छा
हुआ। शत्रु सिरहाने पायताने हैं। अबतक मन बेचैन था।
आपकी चिट्ठीसे मनका समाधान हुआ।” ( १७६३ ई० )
इस एक पत्रके सरल सुन्दर लेखसे हमारे इतिहासका सच्चा
भाव जितना प्रकट हो जाता है, उतना सैकड़ों बेमतलब ग्रन्थोंसे
नहीं होता। कैसे स्वाभाविक ढङ्गसे हिन्दु और हिन्दुस्थान, इन
शब्दोंकी उत्पत्तिका पता इससे चल जाता है और यह भी
मालूम हो जाता है कि अभी गत पीढ़ी तक किस प्रकार हमारे
पूर्वपुरुष इन नामोंको प्यार करते और उनसे अपनेको अभिन्न
मानते थे। यह इतना स्पष्ट उदाहरण है कि इसके बाद दूसरा
उदाहरण देनेकी आवश्यकता नहीं रहती।