हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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जोंने) हस्तिनापुरका राज्य ले लिया। अन्तको आलमगीरके
समयमें यह नौबत आयी कि यज्ञोपवीतपर साढ़े तीन रुपया
जजिया-कर बैठाया गया और गीला अन्न खरीदना पड़ा।
“उस समय स्वर्गवासी शिवाजी महाराज 'शककर्ता' और
धर्मरक्षक पैदा हुए। उन्होंने देशके किसी कदर एक कोनेमें धर्म-
रक्षण किया। बाद स्वर्गीय नाना साहब और भाऊ साहब ऐसे
प्रचण्ड प्रतापसूर्य उदय हुए कि जिनका कोई जोड़ नहीं। इस
समय श्रीमान्के पुण्यप्रतापसे और राजश्री पाटिल बुवाकी बुद्धि
और तलवारके पराक्रमसे खोया हुआ सब कुछ वापिस मिल
गया। पर यह सब कैसे हुआ ? हम लोग जीत गये, इसलिये अब
उसमें कुछ विशेष बात नहीं मालूम होती। यदि मुसलमानोंको
ऐसी विजय प्राप्त होती तो उसपर न जाने कितने इतिहासग्रन्थ
लिखे जाते। मुसलमानोंमें यह दस्तूर है कि जरासी कोई बात
हो जाय तो आकाशतक उसका कीर्ति-स्तंभ खड़ा कर दें। पर
हम हिन्दुओंमें यह चाल है कि महान्से महान् पराक्रम करनेपर
भी उसका कोई जिक्र नहीं। वास्तवमें बात तो ऐसी हुई है कि
अलभ्य वस्तुओंका लाभ हुआ है। यवन सोचते हैं और कहते हैं
कि काफिरशाही स्थापित हो गयी।
“परंतु जिन जिनने हिन्दुस्थानमें सिर उठाया, उनके सिर
पाटिल बुवाने उड़ा दिये। जो बातें कभी न हुईं वे बातें हो
गयीं। शककर्ताके समान इनका प्रबन्ध करके उपभोग करना
अभी आगे बाकी है। पुण्यबलमें क्या कसर रह जायगी और
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