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सर्वकोश
हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 80, कुल 167 में से

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पृष्ठ 80

६४ हिन्दुत्व
साहब लिखते हैं—"मुगल निरे हिन्दू राज्यके शत्रु हैं। उनके
साथ आप मेलकी बातचीत करती हैं और मुझ अपने सेवकको
दोष देती हैं।"
पानीपतके युद्धमें बड़ी भारी हानि हुई पर सर्वस्व नाश नहीं
हुआ। उस युद्धसे दो आदमी बचे और उन्होंने सबको बचा
लिया। नाना फड़नवीस और महादजी शिंदे हिन्दू जातिके
दिमाग, हिन्दू जातिकी ढाल और तलवार थे। पानीपतमें भयं-
कर पराजय होनेके बाद भी ये ५० वर्षतक हिन्दू स्वातंत्र्यकी
लड़ाई लड़े और ये विजयी हुए। इन्होंने हिन्दुओंको हिन्दुस्थान-
का प्रकृत शासक बना दिया। उस समय कैसा दिव्य राष्ट्रीय
चैतन्य और हिन्दुत्वका सदभिमान जाग रहा था, यह उस
समयके नीतिकुशल राजकीय लेखकोंके पत्रव्यवहारसे मालूम
होता है। नाना और महादजीके दिल एक दूसरेसे साफ हो गये—
यह वार्ता सुनकर महाराष्ट्रमें ओरसे छोरतक आनंद छा गया
और निजामकी राजधानीसे गोविंदराव काले नाना फड़नवीसको
लिखते हैं—
“पत्र देखते ही रोमांच हो गया। बहुत संतोष हुआ। चिट्ठीमें
कहाँतक लिखूँ ? ग्रंथके ग्रंथ मनमें उदय हुए। अटक नदीके
इस ओर दक्षिण समुद्रतक हिन्दुओंका स्थान है—तुर्कस्थान नहीं।
पाँडवोंके समयसे विक्रमाजिततक अपनी यही सीमा रही। उन्होंने
इसकी रक्षा करके इसका उपभोग किया। उनके बादके राजा
नालायक निकले। यवनोंका बल बढ़ा। चकतोंने ( बाबरके वंश-