हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहिन्दवानेकी ढाल ६३
सवाई जयसिंहको अपने हिन्दुत्वका वैसा ही ज्वलन्त अभि-
मान था जैसा हिन्दुओंके अन्य नेताओंको । इन्होंने ही मालवेके
परराज्यपीड़ित हिन्दुओंसे यह कहा था कि बाजीरावसे प्रार्थना
करो कि वे हिन्दुओंकी स्वाधीनताके युद्धका क्षेत्र मालवेतक
विस्तृत करें और इस प्रकार शिवाजीके अनुयायियोंकी संततिका
उद्देश्य—हिन्दू-पद्-पादशाहीकी स्थापनाका उद्देश्य पूरा करनेमें
और आगे बढ़ें। अपनी एक चिट्ठीमें इन सुसंस्कृत और देशभक्त
राजपूत राणाने लिखा है—
“सिधिश्री... ...नन्दलालजी प्रधान व भाईजी ठाकुर संस्थान
इन्दोर अमरगढ़सु महाराजाधिराज श्रीसवाई जयसिंगजी कृत
प्रणाम बंचजो ।......सो आपको लिखते हैं कि बादशाहने चढ़ाई
की है तो कुछ चिन्ता नहीं। श्रीपरमात्मा पार लगावेगा। बाजी-
राव पेशवासे हमने आपके निसबत कोलवचन कर लिया है।”
पीछे फिर लिखा है—“हजार शाबाश है। आप सब मालवे सर-
दार एक रहके हिन्दू धर्मका कल्याण होना और मालवेमें हिन्दू-
धर्मकी वृद्धि होना। इस बातपर विचारकर मालवेमेंसे मुसल-
मानोंको नौमेद किये। और हिन्दुधर्म कायम रखा।।” (जयसिं-
हके पत्र २६—१०—१७२१ ई०)
हिन्दुपदपादशाही और हिन्दू-स्वातंत्र्यके इस प्रचण्ड
उद्योगमें बाजीरावके पुत्र नाना साहब सबसे बड़े नेता हुए।
इनका पत्रव्यवहार स्वयं एक अध्ययनकी वस्तु है। सर्वत्र इन्हें
हिन्दुत्वका ही पक्ष करते हुए हम देखते हैं। ताराबाईको नाना