हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंरक्त ही प्रवाहित हो रहा है। इस तरह अफ़गानिस्तानके मुसल-
मान और हिन्दुस्थानके मुसलमानोंमें जितना जीवनैक्य-संबंध
संभव नहीं है उतना हम हिंदुओंमें है। पृथ्वीके और किसी देशकी
किसी जातिमें ऐसा रक्त-संबंध-जन्य जीवनैक्य नहीं जैसा हिन्दू-
जातिमें, क्योंकि हिन्दू-जातिने इस संबंधमें रक्तकी विशुद्धताकी
रक्षा की है और हिन्दू-जातिमें जो अनुलोम-प्रतिलोम विवाहका
निषेध हुआ उसका कारण भी विशुद्ध रक्तकी रक्षा ही है, जिससे
हिन्दू-जातिमें आज शुद्ध, शुद्धतर और शुद्धतम हिन्दू-रक्त वर्ण-
वर्णान्तरोंमें देखा जाता है और साथ ही समग्र हिन्दू-जातिमें
एक ही हिन्दू-रक्त प्रवाहित होता है। यह हिन्दू-रक्त हिन्दू-जाति-
का जीवनैक्य है। क्या इस जीवनैक्यको हम आप अपने अन्तः-
करणमें अनुभव करते हैं ? यदि नहीं करते तो हम अपने आपको
नहीं पहचानते—सिख सनातनियोंको नहीं पहचानते, ब्राह्मण
चांडालको नहीं पहचानते, हिन्दू हिन्दूको नहीं पहचानते और इस
जीवनसंग्राममें शत्रु मित्रको—अपने परायेको—भूलकर आप ही
अपने काल होते हैं ! इसलिये हिन्दुओ, सावधान ! अपने आपको
पहचानो; तुम सब हिन्दू हो, तुम सब बंधु-बंधु हो—ब्राह्मणसे
चांडालतक एक ही हिन्दू-रक्त हिन्दू-जातिमें प्रवाहित हो रहा है
समग्र हिन्दू-जाति एक विराट कुटुम्बके समान है, जिसकी जन्म-
भूमि, संस्कृति और इतिहास एक ही है। जन्मभूमि, रक्त-संबंध,
संस्कृति और इतिहास इन चारों बंधनोंसे बद्ध और कोई जाति
संसारमें नहीं है। हिन्दू-जातिकी इस एकताको अनुभव करना