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हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 76, कुल 167 में से

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६० ( हिन्दुत्व
शिर्के भी इस षड्यन्त्रमें सम्मिलित हुए और मराठोंसे मिले और
राजाराम शत्रु के घिरावको तोड़कर वहांसे निकले ।
शाहू महाराज और सवाई जयसिंहसे तो इस विषयमें वाद-
विवाद ही चल पड़ा था कि, “हिन्दू-धर्मकी रक्षाके लिये हमने
क्या किया और तुमने क्या किया ?” (सरदेसाई मध्यविभाग । )
यही भाव बाजीराव और नाना साहेबकी संतानोंमें था ।
इतिहासकारने लिखा है—“बहुतोंने बाजीरावके ही उद्योगका
अनुकरण और परिपोष किया दिखाई देता है.........ब्रह्मेन्द्र
स्वामी, गोविंद दीक्षित आदि देशभर भ्रमण करके अनुभव प्राप्त
किये हुए साधु पुरुषोंमें यही 'हिंदूपदपादशाही' की भावना काम
कर रही थी और वे अपने सब शिष्योंको इसी भावनासे उप-
देश दिया करते थे ।” (सरदेसाई) बाजीराव स्वयं कहते हैं—“अरे
देखते क्या हो ? चलो कूचकर आगे बढ़ो । हिन्दू-पद-पादशाही
होनेमें अब विलम्ब ही क्या है ?” (बाजीराव)
उस समय पण्डित-समाजमें ब्रह्मेन्द्र स्वामी मुख्य थे ।
परंतु जिस राज्यमें हिंदू-धर्मका उच्छेद होता है उस राज्यमें
रहना उन्होंने उचित नहीं समझा ।......'हिंदू-साम्राज्यमें देव
ब्राह्मणोंपर अत्याचार' यह कितना लज्जाजनक विषय है यह बात
उन्होंने शाहू महाराजको अच्छी तरह समझा दी । ( सरदेसाई )
मथुराबाईने ब्रह्मेंद्र स्वामीको लिखा—“शंकराजी मोहिते,
गणोजी शिंदे, खंडोजी नालकर, रामाजी खराडे, कृष्णाजी मोड
आदि बड़े बड़े सरदारोंने राज्य-रक्षण करके शामलों ( पुर्तगीजों )