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हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

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पृष्ठ 77

हिन्दवानेकी ढाल ६१
को परास्त किया और कोंकणमें हिंदू-धर्मको रक्षा की।” इस
वीरांगना मथुराबाईने जो चिट्ठियां लिखी हैं उनमें देश-भक्तिकी
इतनी प्राण-शक्ति भरी हुई है कि इन चिट्ठियोंको वे लोग अवश्य
पढ़ें जो उस समयके हिंदू-उत्थानका वास्तविक भाव समझना
चाहते हैं।
पुर्तगीजोंने गोवामें जो धर्मोन्माद-मूलक अत्याचार किया
वह यूरोपके धर्मके नामपर होनेवाले अत्याचारका ही भारतीय
संस्करण था। एक बार तो इन्होंने खुलेआम हिन्दू-धर्म-कर्म
करनेकी बिलकुल मनाई कर दी थी। तब स्वाभिमानी अन्ताजी
रघुनाथने इस आज्ञाका उल्लंघन किया और अन्य हिन्दुओंको भी
ऐसा करनेके लिये उत्साहित करने लगा। पर वह यह अच्छी
तरह जानता था कि शक्तिहीन निष्क्रिय प्रतिरोध शक्तिहीन निष्फल
सहिष्णुता है। इसलिये इस प्रतिरोधके पीछे बाजीराव या चिम-
णाजीका खड्ग होना चाहिये। अन्ताजी रघुनाथने ही हिन्दुस्तानके
पुर्तगीज राज्यमें राज्यक्रांति करायी, बाजीरावके पक्षके समस्त
हिन्दू नेताओंकी सहानुभूति प्राप्त की और ऐसा उद्योग किया कि
गोवापर मराठे आक्रमण करें। चिमणाजी अप्पाके सेनापतित्वमें
मराठोंने पुर्तगीजोंपर चढ़ाई की और उनके अधीनस्थ समस्त हिन्दू
प्रदेशोंको स्वाधीन किया।
परन्तु इसी बीच, वसई पुर्तगीजोंके हाथसे निकलनेके पूर्व
नादिरशाहने हिन्दुस्तानपर चढ़ाई की और उसने दिल्लीपर कब्जा-
किया। बाजीरावके मराठे दूतोंने उन्हें लिखा—"तहमास्म कुली-