हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५६ हिन्दुत्व
सकल जगतमें खालसा पंथ गाजे ।
जगे धर्म हिंदू सकल भंड भाजे ॥
(गुरु गोविन्दसिंहकृत विचित्र नाटक)
छत्रपति श्रीशिवाजी महाराजके बखरकार कहते हैं—
“शिवाजीचें मनांत आलें जे आपण हिंदू। सर्व दक्षिण देश
यवनांनी पादाक्रांत केला। क्षेत्रांस पीडा केली। हिंदु-धर्म बुड-
विला। प्राण ही देऊन धर्म रक्षूं। आपलें पराक्रमें नवीन दौ-
लत संपादू, तें अन्न भक्षूं।”
अर्थात् “शिवाजीने मन ही मन विचार किया कि हम हिन्दू
हैं। सर्व दक्षिण देशको यवनोंने पादाक्रांत कर डाला है। तीर्थ-
स्थानोंको क्लेश पहुंचाया है। हिंदू-धर्म डुबा दिया है। प्राण देकर
धर्म-रक्षण करेंगे। अपने पराक्रमसे नवीन राज्य स्थापित करेंगे।
वही अन्न भक्षण करेंगे।”
परंतु बुद्धिमान और विश्वासपात्र दादाजीने सलाह दी--
“आप कहते हैं वह काम तो बहुत अच्छा है, पर इसका पार
लगना बड़ा कठिन है। इसके लिये मजबूत गढ़ चाहिये। स्थान
स्थानमें हिन्दू राजा और हिंदू फौजें सहायता करें तब यह हो।
ईश्वर अनुकूल और सिद्ध पुरुषोंका आशीर्वाद हो तो ऐसी बातें
हो सकती हैं।” (चिटणीस बखर)
शिवाजीके इस संपूर्ण उद्योगमें दादाजीका हाथ था-उन्हींका
तत्वावधान था। युवक शिवाजी अपने एक सहयोगी नवयुवक
देशभक्तको सन् १६४६ ई० में लिखते हैं—