हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
पृष्ठ 71, कुल 167 में से
संदर्भ में पढ़ेंहिन्दवानेकी ढाल ५५
उनके पास जब काश्मीरके ब्राह्मण आये और कहने लगे कि
हमारे ऊपर असह्य अत्याचार हो रहा है और हमसे यह कहा जा
रहा है कि "या तो इस्लाम कबूल करो या मौत", तब गुरु तेग-
बहादुरने उन्हें यह सलाह दी—
तुम सुनो दिजेसु ढिग तुर्केसु अबैसु इम गावो ।
इक पीर हमारा हिंदु भारा भाईचारा लख पावो ॥
है तेगबहादुर जगत उजागर ता आगर तुर्क करो ।
तिस पाछे तबही हम फिर सबही बन हैं तुरक भरो ॥
( पंथप्रकाश )
"हे द्विजो ! सुनो । तुम लोग तुर्कों ( मुसलमानों ) के पास
जाओ और निर्भय होकर उनसे कहो, "हमारा एक बड़ा हिंदू पीर
है, जिसके लाखों शिष्य हैं। उसका नाम तेगबहादुर है, वह जग-
तमें प्रकाश फैलानेवाला है। पहले उससे इस्लाम कबूल करवाओ
तब हमलोग भी इस्लाम कबूल करेंगे ।"
और जब जाति और धर्मके शत्रु आने उन्हें ललकारा तब—
तिनते सुन श्रीतेगबहादुर । धर्म निबाहण विषे बहादुर ॥
उत्तर भन्यौ धर्म हम हिन्दु । अति प्रियको किमकरे निकंदु ॥
( सूर्य प्रकाश )
"उनकी बात सुनकर धर्म निबाहनेमें बहादुर श्रीतेगबहादुरने
यह जवाब दिया कि हमारा धर्म हिन्दू है,यह हमारा अति प्रिय हैं,
इसका अपमान न होने देंगे ।"
इन्हींके पुत्र जगवंदित गुरुगोविन्दसिंह, जो हमारी हिन्दुजाति-
के कवि, धर्मोपदेशक और योद्धा थे, कहते हैं—