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हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 70, कुल 167 में से

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पृष्ठ 70

५४ \qquad हिन्दुत्व
राजसे मिले थे। तब शिवाजी महाराजने यह कहकर उन्हें बहुत
ही उत्साहित किया था कि—
“तुम छत्री सिरताज। जीत अपनी भूमिकौ करौ देशको राज॥”
पीछे बुन्देलखंडके सुजानसिंह नामक एक शक्तिशाली क्षत्रिय
राजा महाराज छत्रसालसे मिले। दोनोंकी जो बातचीत हुई,
उसमें सुजानसिंहने देशकी तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितिका
कैसा हृदय-विदारक वर्णन किया है—
“पातसाह लागे करन, हिन्दूधर्मकौ नासु।
सुधि कर चंपतरायकी, लइ बुन्देला सासु॥
जब तैं चंपति कस्यौ पयानौ, तबतैं पर्यो हीन हिंदवानो॥
लग्यो होग तुरकनको जोरा, को राखे हिन्दुनको तोरा॥
अब जो तुम कटि कसौ कृपाती, तौ फिरि चढे हिंदु मुख पानी॥”
वृद्ध सुजानसिंहने यह कह कर अपना खड्ग और हृदय छत्र-
सालको अर्पण किया और उन्हें आशीर्वाद दिया—
यह कहि प्रीति हिये उमगाई। दिये पान किरबान बधाई॥
दोऊ हाथ माथपर राखे। पूरन करौ काज अभिलाषे॥
हिन्दुधरम जग जाई चलावौ। दौरि दिल्लीदल हलनि हलावौ॥
(छत्रप्रकाश)*
पंजाबमें गुरु तेगबहादुर सिंहने स्वाधीनताका पक्ष केवल
ग्रहण ही नहीं किया बल्कि उसपर अपने प्राण उत्सर्ग कर दिये।

  • छत्रप्रकाश ऐतिहासिक ग्रन्थ है। इसमें महाराज छत्रसालके राज्यका
    वर्णन है और इसे उन्हींकी आज्ञासे लाल कविने लिखा है।