हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहिन्दवानेकी ढाल ५३
शेष क्षणतक वे अपने उद्दीपक गीतोंको सुनाकर तत्कालीन हिन्दू
नेताओंमें हिन्दुत्वका अभिमान जगाते रहते थे। शिवाजीके
बाद उनके दूसरे प्रिय नेता बुन्देलखण्डके वीर छत्रसाल महा-
राज थे।
भूषण कहते हैं—
हैबर हट्ट साजि, गैबर गट्ट सम-
पैदर थट्ट फौज तुरकानेकी।
भूषन भनत राय चंपतिको छत्रसाल
रोप्यो रनख्याल व्हैकै ढाल हिन्दवानेकी ॥
यह महाराज छत्रसालकी केवल व्याजस्तुति नहीं है। छत्र-
साल वास्तवमें वैसे ही थे जैसे शिवाजी, राजसिंह, गुरुगोविन्द
सिंह जो “ढाल हिंदवानेकी” थे। वे अपनेको "हिन्दुत्व" के
रक्षक समझते थे। छत्रसाल कहते हैं—
हिंदू तुरक दीन द्वै गाये। तिनसों बैर सदा चलि आये ॥
लेख्यो सुर असुरनको जैसो। केहरि करिन बखानो तैसो ॥
जबते शहा तखतपर बैठे। तब तै हिंदुन सौं उर डाठे ॥
जजिये कर तीरथिन लगाये। वेद देवाले निदर ढहाये ॥
सब रजपूत सीस नित नावै। ऐड करै नित पै दल धावै ॥
ऐड एक सिवराज निबाही। करै आपके चित्तकि चाही ॥
आठ पातसाही झुक झोरै। सूबनि बांधि डांड लै छोरै ॥
बुन्देला वीर महाराज छत्रसाल छत्रपति श्रीशिवाजी महा-