सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 6, कुल 167 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 6

चाहे कोई सिख हो या सनातनी, आर्यसमाजी हो या जैनी,
ब्राह्मण हो या चांडाल, उसे अपने मनुष्यत्वकी पहचानके
बाद सबसे पहला ज्ञान यह होना चाहिये कि हम हिन्दू हैं,
हिन्दुत्व हमारा प्राण है, अखिल हिन्दू-जाति ही हमारा आधार
है। चाहे कोई आध्यात्मिक दृष्टिसे देखे, या सांसारिक दृष्टिसे, इस
सिद्धान्तको वह अस्वीकार नहीं कर सकता। उसे यह मानना ही
होगा कि हिन्दू-जातिके अन्तर्गत सब समाजों और धर्म-संप्रदायों
आधार हिन्दुत्व है और इसलिये यह जानना होगा कि वह
हिन्दुत्व क्या है। प्रस्तुत पुस्तकका वही विषय है और इसलिये
हम यहाँ उसका विस्तार नहीं करेंगे। पाठक पुस्तक पढ़कर यह
स्वयं अनुभव करेंगे कि समग्र हिन्दू-जाति एक है, इस जातिका
मनःसंस्कार और इतिहास एक है; जन्मभूमि एक है और
रक्त भी एक है। हिन्दू-जातिमें सनातनधर्म-समाजके चारों या
पाँचों वर्ण, आर्यसमाज, सिख, जैन, बौद्ध, लिंगायत तथा अन्य
असंख्य पंथ हैं; पर इन सबमें जो जीवनरस प्रवाहित हो रहा है,
वह एक हिन्दू-रक्त ही है। रक्त-संबंधसे बढ़कर दृढ़ बन्धन दूसरा
है ही नहीं। इस समय हिन्दू-जातिके भिन्न-भिन्न वर्णों और
समाजोंमें परस्पर रक्त-संबंध नहीं होता। हम सनातनधर्मावलंबी
ऐसा चाहते भी नहीं। यही नहीं, बल्कि असवर्ण-विवाहके हम
घोर विरोधी भी हैं। पर ऐसा होते हुए भी हम इस बातको
अस्वीकार नहीं कर सकते कि यह जो हिन्दू-जाति है, यह एक ही
रक्तसे उत्पन्न हुई है और प्रत्येक हिन्दूमें हमारे पूर्वतम पितरोंका