हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५२ हिन्दुत्व
दाढ़ीके रखयनकी दाढ़ीसी रहति छाति ।
बाढ़ी जस मर्याद हद्द हिन्दुवानेकी।
कढि गयी रयतिके मनकी कसक
मिट गयी ठसक तमाम तुरकानेकी ॥
भूषन भनत दिल्लोपति दिल धकधका
सुनि सुनि धाक सिवराज मरदानेकी ।
मोटी भई चण्डी बिन चोटीके चबाय सीस
खोटी भई संपति चकताके घरानेकी ॥
शिवाजीके पराक्रमका वर्णन करते हुए भूषण कहते हैं—
राखी हिन्दुवानी, हिन्दुवानके तिलक राख्यो ।
स्मृति और पुराण राख्यो, वेद विधी सुनि मैं ।
राखी रजपूती राजधानी राखी राजनकी ।
धरामैं धरम राख्यो राख्यो गुण गुणीमें ॥
भूषण सुकवि जीति हद्द मरहट्टनकी
देस देस कीरति बखानि तव सुनि मैं ।
साहिके सुपूत सिवराज समसेर तेरी,
दिल्लो दल दाबिकै दिवाल राखी दुनिमैं ॥
इस दृष्टिसे शिवाजी महाराज और उनके साथियोंके पराक्र-
मोंकी समस्त हिन्दुस्थानमें स्तुति हो रही थी । भूषण मराठे नहीं
थे, पर शिवाजीसे बाजीरावपर्यन्त समस्त मराठा विजेताओंकी
विजययात्राका उन्हें उतना ही अभिमान था, जितना स्वयं मरा-
ठोंको । भूषण हिन्दुत्वके परम अभिमानी थे और अपने जीवनके