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हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

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पृष्ठ 67

हिन्दवानका ढाल ५१
येथून वाढला धर्म, राजधर्मासमागमें ।
संतोष मांडिला मोठा, आनन्दवनभुवनीं ॥ ४ ॥
बुडाला औरंग्या पापी, म्लेच्छ संहार जाहला ।
मोडिलीं मांडिलीं छत्रें, आनन्दवनभुवनीं ॥ ५ ॥
बोलणें वाउगें होतें, चालणें पाहिजे बरें ।
पुढें घडेल तें खरें, आनन्दवनभुवनीं ॥ ६ ॥
स्मरलें लिहिलें आहे, बोलता चालता हरो ।
उदंड जाहलें पाणी, स्नान संध्या करावया ।
जप तप अनुष्ठानें, आनन्दवनभुवनीं ॥ ७ ॥
राम कर्ता राम भोक्ता, आनन्दवनभुवनीं ॥ ८ ॥
हमारे उन राष्ट्रीय चारणोंमें जो हिन्दू स्वाधीनताके युद्धके
उस कालमें देशभरमें भ्रमण करके हिन्दुस्थानको “तस्मात् त्व-
मुत्तिष्ठ यशोलभस्व” का उपदेश दे रहे थे उनमें भूषण कवि बहुत
प्रसिद्ध हैं। उन्होंने औरङ्गजैबको ललकारा था—
लाजधरौ शिवजीसे लरौ सब सैयद सेख पठान पठायके ।
भूषन ह्यां गढकोटन हारे उहां तुम क्यों मठ तोरे रिसायके ॥
हिन्दुनके पतिसों न बिसात सतावत हिन्दु गरीबन पायके ।
लीजै न कलंक दिल्लीके बालम आलम आलमगीर कहायके ॥
भूषण फिर दूसरे स्थानमें कहते हैं—
जगतमै जीते महावीर महाराजनेते
महाराज बावनहू पातसाह लेवा ने ।
पातसाह बावनौ दिल्लीके पातसाह दिल्लीपति
पातसाहजीसो हिन्दुपति सेवाने ॥