हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५० हिन्दुत्व
यह ध्यानमें रखनेकी बात है कि रासोमें बार बार "भारत"
शब्द आया है पर वह "महाभारत" के अर्थमें आया है। भारत-
वर्षके अर्थमें शायद ही कहीं आया हो । यही बात इसके बादके
साहित्यमें भी देखते हैं। हिन्दुओंका फिरसे उत्थान होने और
हिन्दू-स्वातंत्र्यका युद्ध आरम्भ होनेके पूर्वतक संपूर्ण साहित्यमें
"हिन्दु और हिन्दुस्थान" इन नामोंकी ही सर्वत्र महिमा गायी
गयी है। हिन्दू-स्वातन्त्र्य-युद्धके महोपदेशक और आचार्य समर्थ
रामदास स्वामी अपनी अलौकिक उक्तियोंमें एक स्थानपर उस
दिव्य दृश्यका वर्णन करते हैं जिसे उन्होंने स्वप्नमें देखा था और
जिसे वे विजयोत्साहके साथ कृतज्ञतापूर्वक कहते हैं कि, अधि-
कांशमें सिद्ध हो गया है—
* स्वप्नें जें देखिलें रात्रीं, तें तें तैसेंचि होतसे ।
हिंडतां फिरतां गेलों, आनन्दवनभुवनीं ॥ १॥
बुडाले सर्व ही पापी, हिन्दुस्थान बलावलेँ ।
अभक्तांचा क्षयो झाला, आनन्दवनभूवनीं ॥२॥
कल्पांत मांडिला मोठा, म्लेच्छ दै त्य बुडावया ।
कैपक्ष घेतला देवीं, आनन्दवनभूवनीं ॥ ३ ॥
※ “रातको स्वप्न देखा, ठीक वही सब हो रहा है। घूमते फिरते
आनन्दवन भवनमें गये। देखा सब पापियोंका नाश हो गया है, हिन्दुस्थान
सबसे बलवान हुआ है; अभक्तोंका क्षय हो गया है और पापियोंका नाश
करनेके लिये, प्रलयंकारो प्रचंड उद्योग हो रहा है, देवता हमारे साथ हैं।
यहांसे राजधर्मके साथ साथ धर्मका अभ्युत्थान हो रहा है; सबको इससे
बड़ा संतोष है। औरंग डूबा। शत्रुओंका संहार हुआ। अष्ट छत्र फिरसे
प्रतिष्ठित हुए । बोलनेमें दोष है, करके दिखाना चाहिये; आगे जो कुछ हो,
वही सत्य है। स्नान-सांध्या, जप-तप. अनुष्ठानके लिये अब जलकी कोई
कमी नहीं है। जो कुछ स्मरण हुआ, वही लिखा । भगवान प्रत्यक्ष हैं।
राम ही कर्त्ता और राम ही भोक्ता हैं।”