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हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 65, कुल 167 में से

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पृष्ठ 65

हिन्दूवानका ढाल ४६
आगकी चिनगारियां निकलने लगीं, शहाबुद्दीनकी ललकार सुनाने-
के लिये जो यवनदूत दरबारमें आया था उससे चामुण्डरायने कहा
कि, “शाहको याद दिलाओ कि हमारे ही सामने तुमने अपनी नाक
रगड़ी थी, अब बेहया होकर चढ़ाई करने आये हो !” चामुण्डराय
फिर बोले—
“निर्लज्ज म्लेच्छ लजै नहीं । हम हिन्दू लजवान ॥”
दुःखका दिन समीप आया । दोनों ओरके लोग जानते थे कि
यह भाग्यका खेल है । न जाने कौन हारेगा और कौन जीतेगा ।
हम्मीरकी हारके कुछ ही पहले चन्द बरदाई भगवती दुर्गाकी
स्तुति करते हैं—कैसी हृदयद्रावक और देशभक्ति पूर्ण स्तुति है--
“तू गे हिन्दुराजान वन्दी न आर्यं ।
जपै जाप जालंधरं तूं सहायं ॥
नमस्ते नमस्ते इ जालंधररानी !
सुरं आसुरं नागपूजा प्रमानी ॥”
चन्दने फिर युद्धका जो कुछ परिणाम हुआ उसका वर्णन
करके उस प्रसंगका वर्णन किया है जब कौशल रचकर पृथ्वी-
राजने शहाबुद्दीनका सिर धड़से उतार लिया । अन्तमें विजित
हिन्दपति पृथ्वीराजकी इस प्रकार मर्मस्पर्शी शब्दोंमें स्तुति की--
“धनि हिन्दु पृथिराज, जिने रजवट्ठ उजारिय ।
धनि हिन्दु पृथिराज, बाले कलिमझूझ उजारिय ॥
धनि हिन्दु पृथिराज, जेन सुविहान ह संध्यो ।
बार बारह ग्रहि मुक्कि, अन्तकाल सर बन्ध्यो ॥”