हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४८ हिन्दुत्व
असमय अरबस्तान चला करन उद्दूसा क्रम ॥”
और फिर—
“जुरे हिन्दु मीरे, बहे खग्ग तारं ।
मुखे मार मारं बहे सूरसारं ॥”
अन्तको—
“हिन्दु म्लेच्छ अघाइ घाइन ।
नंचि नारद युद्ध चायन ॥”
पर हिन्दुओंको कुचलनेका इतना प्रयत्न करके भी शहाबुद्दीन-
से कुछ न बन पड़ा और दिल्लीमें जब यह समाचार पहुँचा कि
शहाबुद्दीन फिर कैद किया गया तब प्रजाके आनन्दका पारावार
न रहा । प्रजाने पृथ्वीराजको प्रेम और आनन्दसे बधाई दी—
“आज भाग चहुआन घर ।
आज भाग हिन्दवान ॥
इन जीवित दिल्लीश्वर ।
गंज न सकै आन ॥”
शहाबुद्दीनने फिर प्रतिज्ञा की कि अब ऐसा नहीं करूँ गा । पहली
सब प्रतिज्ञाएं वह भंग कर चुका था । फिर इस प्रतिज्ञाने उसे
रिहाई दिला दी । पर कृतघ्न शहाबुद्दीनने फिर हिन्दुस्थानपर
आक्रमण किया । और ऐसी तैयारी और जोरके साथ आक्रमण
किया कि बातकी बातमें दिल्लीके द्वारपर पहुँच गया । हिन्दपति
पृथ्वीराजने युद्धसभा निमंत्रित की, शहाबुद्दीनने गुस्ताखीके
साथ हिन्दपतिको ललकारा, सब रावल और सामन्तोंकी आँखोंसे