हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहिन्दवानेको ढाल ४७
चन्दबरदाई हिन्दी-साहित्यके अदि कवि माने जाते हैं और
इन्होंने हिन्दु, हिंदवान, हिन्द—इन शब्दोंका इतनी बार और इतनी
स्वाभाविकताके साथ प्रयोग किया है कि इस विषयमें कोई
सन्देह ही नहीं रह जाता कि ११ वीं शताब्दीमें ये शब्द सर्व-
साधारणमें प्रचलित थे । यह वह समय है, जब पंजाबमें भी
मुसलमानोंके पैर नहीं जमे थे और यह सम्भव नहीं है कि वे इस
समयके स्वाधीन और स्वाभिमानी राजपूतोंसे कोई ऐसा नाम
स्वीकार करा सकते, जो उनके प्रति घृणा सूचित करनेके लिये
उनके शत्रुओने रखा हो, और न यह संभव है कि ऐसा नाम ये
राजपूत गौरव और अभिमानके साथ अपना लेते । शहाबुद्दीनको
जिस समय हिन्दुओंने कैद किया और पृथ्वीराजने उससे यह शर्त
करा कर कि फिर कभी “हिन्दुओंपर आक्रमण नहीं करेंगे”, उसे
छोड़ दिया, उस समयका वर्णन करते हुए चन्द कहते हैं—
“राखि पंच दिन साहि अदब आदर बहु किन्नौ।
सुज हुसैन गाजी सुपूत हथ्थे ग्रहि दिन्नौ ॥
किय सलाम तिन बार जाहु अपन्ने सुथानह ।
मति हिन्दुपर साहि सज्जि आऔ स्वस्थानह ॥”
(पृ० रासो स० ६)
पर शहाबुद्दीन ऐसा आदमी नहीं था जो हिन्दुओंकी वीरो-
चित उदारताका कृतज्ञ होता । बार बार फौज जमा करके वार
वार उसने अपने उपकारीके साथ जंग छेड़ा—
"जब हिन्दु दल जोर हुअ छुट्टि मीरधर भ्रम ।