हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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के घावोंपर विलाप करतीं और हिन्दुओंकी विजयपर गर्व
करतो थीं।
इस संबंधमें उस समयके ग्रन्थकारोंने जो कुछ लिख रखा है
उसके यदि हम अवतरण दें तो एक बड़ा ग्रन्थ बन जायगा।
यह काम तो बड़ा प्रिय है पर जो बात यहां सिद्ध करनी है उसके
लिये इसकी आवश्यकता नहीं। इसलिये यहां उस कालके श्रेष्ठ
पुरुषोंके मुखसे या लेखनीसे निकले हुए वर्णनोंके कुछ अवतरणों-
से ही हमें संतोष करना चाहिये।
हिन्दी भाषामें जितने नये पुराने ग्रन्थ हैं उनमें चन्दबरदाई-
कृत “पृथ्वीराज रासो” नामक महाकाव्य सबसे प्राचीन प्रामा-
णिक ग्रन्थ है। इसमें एक ही पद्य ऐसा है जो इस ग्रन्थकी रच-
नासे भी पहलेका है। परन्तु आश्चर्य और आनन्दका विषय
यह है कि हमारे उत्तरापथके प्राकृत साहित्यकी इस सबसे
प्राचीन कवितामें हिन्दुस्थानकी पूर्ण देशाभिमानयुक्त और गौरव-
सूचक स्तुति है। चन्दबरदाईके पिता, वेन कवि, पृथ्वीराजके पिता
अजमेर-महाराजको संबोधन कर कहते हैं—
अटल ठाट महिपाट, अटल तारागढ़ थानं ।
अटल नग्र अजमेर, अटल हिन्दव अस्थानं ॥
अटल तेज परताप, अटल लंका गढ़ डंडिय ।
अटल आप चहुवान, अटल भूमि जस मंडिय ॥
संभरी भूप सोमेसनृप, अटल छत्र ओपै सुसर ।
कविराज वेन आसीस दे, अटल जगां रजेस कर ॥