हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहिन्दुत्व भी है। उस हिन्दुत्वको हम हिन्दूधर्म कह सकते हैं। पर
'धर्म' शब्दका आजकल इतना संकुचित अर्थ होने लगा है कि
उससे लोग एक विशिष्ट प्रकारके धर्म-संप्रदायका ही अर्थ ग्रहण
करते हैं। इसलिये इस पुस्तकमें जानबूझकर हिन्दूका वह सहज-
धर्म, जिससे हिन्दू हिन्दू कहाता है, "हिन्दू-धर्म" नहीं कहा गया,
बल्कि "हिन्दुत्व" कहा है जिससे किसी संप्रदायके धर्मका भ्रम
उसमें न हो। हिन्दुस्थानमें हिन्दू-जातिके अन्तर्गत सनातनधर्म
समाजसे लेकर राधास्वामी पन्थतक नानाविध धर्म-संप्रदाय हैं।
ऐसे प्रत्येक संप्रदाय या समाजका संप्रदाय-धर्म उस समाज या
संप्रदायका समाजत्व या संप्रदायत्व है। परन्तु इन सब समा-
जोंका आधारभूत एक धर्म है, एक तत्व है और वह सबके लिये
सामान्य है। उसी धर्म या तत्वका नाम है 'हिन्दुत्व'। वह
हिन्दुत्व क्या है, यह प्रत्येक हिन्दूको जानना चाहिये, प्रत्येक हिन्दू-
समाजको जानना चाहिये, प्रत्येक हिन्दू-धर्मसंप्रदायको जानना
चाहिये। प्रत्येक मनुष्यको जैसे पहले यह जानना चाहिये कि
हम मनुष्य हैं और तभी वह मानवधर्मशास्त्रमें अपना विशिष्ट
धर्म जाननेका अधिकारी होता है, वैसे ही प्रत्येक हिन्दूको
पहले यह जानना चाहिये कि हम हिन्दू हैं और तभी वह अपने
विशिष्ट धर्म-संप्रदायका अधिकारी होता है। "हम हिन्दू हैं"
इस बातकी पहचान जिस हिन्दू व्यक्ति या समाजको न
हो, उसे यही पता नहीं है कि हम कहाँ हैं, हमारे अस्तित्वका
आधार क्या है, हमारी शक्तिका उद्गमस्थान क्या है। इसलिये