हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४२ हिन्दुत्व
परन्तु इतिहासमें यह प्रायः देखा जाता है कि अकंटक सुख
और समृद्धिसे गफलत आ जाती है और राष्ट्रको स्वप्न देखते हुए
पड़े रहनेका अभ्याससा हो जाता है। सिन्धुस्थानकी यही गति
हुई । सिन्धुराष्ट्र स्वप्न देखता रहा। अन्तको महम्मद गजनवी
सिन्धुस्थानकी सीमा-रेखा सिन्धु नदी पार करके सिन्धुस्थानपर
चढ़ आया। तब आंखें मलता हुआ हिन्दुस्थान जागा। जीवन-
मरणका संग्राम उस दिन आरम्भ हुआ। आत्म-चैतन्य अना-
त्मके साथ युद्ध करनेसे ही बहुत अच्छी तरहसे प्रकट होता है।
समस्त राष्ट्रको एक करनेकी शक्ति जितनी समान शत्रुके आक्रम-
णके दृश्यमें है उतनी और किसीमें नहीं। द्वेष परस्परको बिल-
गाता और एक भी करता है। हिन्दुस्थानके अखंड, अभेद्य और
एक होनेका वह उत्तम अवसर था जब वह दुर्द्दिन उपस्थित हुआ
कि उस मूर्ति-भंजक म्लेच्छने सिन्धुको पार किया। कासिमकी
मुसलमान सेनाने भी सिन्धुको पार किया था, पर उसकी
चोट गहरी नहीं थी, उससे हृदयमें घाव नहीं हुआ, हृदयपर उसने
वार भी नहीं किया। सच्चा संग्राम तो महम्मद गजनवीके साथ ही
आरम्भ हुआ—(और समाप्त कब हुआ ?—अब्दालीके साथ ?)
वर्षानुवर्ष बीत चले, शताब्दियां उलट गयीं और संग्राम जारी
रहा। अरब-स्थान जो कुछ था वह नहीं रहा, ईरान नष्ट हो
गया; मिश्र, शाम, अफगानिस्तान, बलूचिस्तान, तारतरी-ग्रना-
डासे गजनी तक—सब राष्ट्र अपनी संस्कृतिके साथ इस्लामके
खड्गके सामने ढेर हो गये। परन्तु हिन्दुस्थानमें उस खड्गने वार तो
किया पर वह उसे मार न सका। प्रत्येक वारके साथ उस खड्गकी