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हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 57, कुल 167 में से

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पृष्ठ 57

[Header] हिन्दवानेकी ढाल ४१

त्रिक राष्ट्रभाषाकी उत्पत्ति और वृद्धि उसी समयसे हुई है जिस
समयसे सिन्धुस्थान या हिन्दुस्थान और सिन्धु या हिन्दू इन
प्राचीन नामोंका पुनः स्थापन और प्रचार हुआ है और इसलिये
स्वभावतः ही जो भाषा संपूर्ण राष्ट्रकी अपनी भाषा थी वह
हिन्दुस्थानो या हिन्दी कहलायी ।
हूणों और शकोंको मार भगानेके पश्चात् सिन्धुस्थानके क्षात्र-
बलकी बदौलत कई शताब्दियोंतक यहां शान्ति विराजती रही
और एक बार फिर हिन्दुस्थानने सुख और समृद्धिका बड़ा
जमाना देखा । स्वाधीनताका सुख राजा और रङ्क सभीको समा-
नरूपसे प्राप्त हुआ। देशभक्तग्रन्थकारोंने हमारे इतिहासके इस बड़े
भारी अध्यायमें सहस्राधिक वर्षव्यापी तत्कालीन गौरव और सुखा-
नुभवका देशाभिमानसे मस्त होकर इस प्रकार वर्णन किया है—
ग्रामे ग्रामे स्थितो देवः देशे देशे स्थितो मखः ।
गेहे गेहे स्थितं द्रव्यं धर्मश्चैव जने जने ॥
( भविष्यपुराण प्रतिसर्ग पर्व )
सिंहलद्वीपसे काश्मीरपर्यन्त एक ही राजवंशके राजपूतोंका
राज्य था और सब राजा परस्परमे विवाह-बन्धनसे बंधे थे;
इससे भी अधिक सबकी संस्कृति, धर्म और पूर्व-परंपरा एक थी,
समस्त राष्ट्रका जीवन एकरस था। वह जितना समृद्ध था उत-
नाही पवित्र था। और सबकी एक राष्ट्रभाषा थी। राष्ट्रभाषाकी
यह एकता हमारे राष्ट्रीय जीवनकी आन्तरिक एकताका ही
बाह्य रूप था।