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हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 56, कुल 167 में से

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पृष्ठ 56

हिन्दुओंका वर्णन है। संस्कृत भाषा हमारी जातिकी परम पवित्र
सम्पत्ति है और वह सदा वैसी ही रहेगी, उससे हमारी जाति
मूलतः एक है यह बात सामने रहेगी, उससे जीवनकी समृद्धिके
साधन प्राप्त होते रहेंगे, उससे हमारे आदर्श उच्च होंगे, हमारा
जीवन पवित्र रहेगा—यह सब होगा; परन्तु हमारी जातिकी प्रच-
लित जीवित भाषा होनेका सम्मान उस प्राकृतको ही प्राप्त हुआ
है जो संस्कृतकी सबसे बड़ी बेटी है और वह हिन्दी या
हिन्दुस्थानी ही कहलाती भी है। प्राचीन सिन्धुओं या हिन्दुओंके
वर्तमान वंशजोंकी राष्ट्रीय और सांस्कृतिक भाषा यही है। हिन्दु-
स्थानी ही हिन्दुस्थानकी भाषा है। हिन्दीको राष्ट्रभाषाके उच्चपद-
पर बैठानेका प्रयत्न नवीन भी नहीं है और कृत्रिम भी नहीं है।
हिन्दुस्थानमें ब्रिटिश राज्य स्थापित होनेकेकई शताब्दियां पूर्व अपने
इतिहास ग्रन्थोंमें हम यह लिखा हुआ पाते हैं कि भारतवर्षभरमें
यही माध्यम भाषा थी। कोई साधु या सौदागर रामेश्वरसे चल-
कर हरद्वारतक जाते हुए इसी भाषाके द्वारा अपनी बात दूसरोंको
समझाता और दूसरोंकी बात स्वयं समझता था। संस्कृत भाषा-
के द्वारा कोई भी पण्डितोंकी सभा और राजाओंके दरबारमें
पहुंच सकता था, परन्तु बाजारसे लेकर राजसभातक सर्वत्र
अनायास पहुंचनेके लिये हिन्दी भाषा ही आम परवाना थी।
नानक, चैतन्य, रामदास देशभरमें वैसी ही स्वच्छन्दताके साथ
भ्रमण करते थे जैसे वे अपने अपने प्रदेशमें करते और सबको
इसी भाषाके द्वारा अपने उपदेश सुनाते थे। हमारी इस वास्त-